
स्मैक छुड़ाने के लिए पुलिस-चिकित्सकों की विशेष टीम गठित
जोधपुर.
स्मैक ने शहर ही नहीं गांवों तक के युवाओं को दलदल में फंसा रखा है। इनसे न सिर्फ परिजन बल्कि वारदातों की वजह से पुलिस भी हैरान-परेशान है। इनसे निजात पाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट की ओर से चल रहे ऑपरेशन क्रैक डाउन-डी अभियान के तहत मंगलवार को पुलिस व चिकित्सकों की टीम बनाई गई है। जो स्मैक के आदी व्यक्तियों की काउंसलिंग करने के बाद मथुरादास माथुर अस्पताल में नशा छुड़ाने के लिए इलाज भी कराएंगे। कोई भी व्यक्ति जो स्मैक छोडऩे चाहते हैं वो पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) के मोबाइल नम्बर ८७६४५१९२०२ पर पूरी जानकारी संदेश के मार्फत भेज सकते हैं।
पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) प्रीति चन्द्रा ने बताया कि ऑपरेशन क्रैक डाउन-डी अभियान के तहत पुलिस दो तरह से कार्य कर रही है। एक तरफ नशे के सौदागरों की धरपकड़ के लिए विशेष टीम लगाई गई है। जो स्मैक व अन्य मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। दूसरी तरफ, स्मैक की डिमांड ही खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। नशा छुड़ाने के लिए डिएडिक्शन कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके लिए पुलिस-चिकित्सकों की विशेष टीम बनाई गई है। जिसमें वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ नगेन्द्र शर्मा, सहायक पुलिस आयुक्त (प्रतापनगर) नीरज शर्मा, प्रतापनगर थानाधिकारी अमित सिहाग, साइकोलॉजिस्ट प्रो. रवि गुमटे और सहायक आचार्य डॉ सुरेन्द्र प्रजापत को शामिल किया गया है।
काउंसलिंग कर इलाज के लिए करेंगे मानसिक तैयार
डीसीपी प्रीति चन्द्रा का कहना है कि स्मैक की गिरफ्त वाले लोग नशा उतरने पर उसे छोडऩा चाहते हैं। इसमें परिजन उनकी मदद भी करते हैं, लेकिन कुछ देर बाद या एक-दो दिन में वह फिर से चोरी छुपे नशा करने लग जाता है। वहीं, कई व्यक्ति एेसी गिरफ्त में हैं जो नशा छोडऩा ही नहीं चाहते हैं। जबकि परिजन नशा छुड़ाने की पूरी कोशिश करते हैं। एेसे व्यक्ति के बारे में परिजन मोबाइल नम्बर ८७६४५१९२०२ पर पूरी जानकारी भेज सकते हैं। फिर पुलिस व चिकित्सक काउंसलिंग कर स्मैक छोडऩे के लिए मानसिक रूप से तैयार करेंगे। इसके बाद उसका एमडीएम अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों से परामर्श कराया जाएगा। फिलहाल पुलिस के पास पांच व्यक्तियों ने स्मैक छोडऩे के लिए सम्पर्क किया है।
Published on:
29 Jan 2020 02:01 am
