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खतरनाक! इन्हें टोकिए, पानी में मत लगाओ ‘जानलेवा’ छलांग

तूरजी का झालरा में नहाने के लिए अबोध बालक ऊंचाई पर जाकर छलांग लगा रहे हैं। बच्चों का यह अति उत्साह उनके लिए ‘जानलेवा’ साबित हो सकता है।
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Stop your child, say them do not jump in deep water

खतरनाक! इन्हें टोकिए, पानी में मत लगाओ ‘जानलेवा’ छलांग

जितेंद्र सिंह राजपुरोहित.
जोधपुर. शहर का एेतिहासिक तूरजी का झालरा। पुरा वैभव की धरोहर को देखते ही मन मयूर नाच उठता है। मन खुश भी क्यों न हो, क्योंकि यह हमारे शहर की प्राचीन कलात्मक धरोहर जो है। समय के साथ इन प्राचीन जलस्रोतों के महत्व को अब भुलाया जा रहा है। इनकी देखरेख न होने के साथ ही यहां लोगों की ओर से गंदगी भी फैलाई जा रही है। इतना ही नहीं, यहां नहाने के लिए अबोध बालक ऊंचाई पर जाकर छलांग लगा रहे हैं। बच्चों का यह अति उत्साह उनके लिए ‘जानलेवा’ साबित हो सकता है। संतुलन बिगडऩे, चोट लगने अथवा डूबने से यहां उनकी जान को भी खतरा है। यहां स्नान करने के लिए आने वाले कई बच्चे तैरना नहीं जानते, फिर भी वे दूसरे बडे़ लोगों को देखकर गहराई वाले पानी में छलांग लगाने को दुष्प्रेरित होते हैं। बच्चों की यह गलती उनके परिजनों को जिंदगी भर का दर्द भी दे सकती है। एेसा भी नहीं है कि यहां डूबने जैसी घटनाएं नहीं होती है। आए दिन झालरे में डूबकर मरने की खबरें आती है, फिर भी यहां कई अबोध बच्चे स्नान करने पहुंच ही जाते हैं। तूरजी के झालरे के पास नगर निगम की ओर से चेतावनी बोर्ड भी लगे हैं। चेतावनी बोर्ड पर ‘तूरजी का झालरा एक गहरा जलस्रोत है। किसी भी अप्रिय दुर्घटना से बचने के लिए कृपया पर्याप्त दूरी बनाए रखें।’ लिखा हुआ है। बावजूद इसके शहर के कई बच्चे यहां ‘खतरनाक गोता’ लगाने से बाज नहीं आते।

एेसा है तूरजी का झालरा

मकराना मोहल्ला में चारों तरफ हेरिटेज गेस्ट हाउस से घिरा हुआ है यह इलाका। इतिहासकार बताते हैं कि जोधपुर के महाराजा अभयसिंह की महारानी तंवर (तूर रानी) ने वर्ष 1740 में झालरा बनाया था, जिसके कारण इसका नाम तूरजी का झालरा पड़ा। झालरे का पानी का प्रयोग मुख्य रूप से महिलाएं ही करती थी, क्यों कि पानी भर कर लाना और उसे इकट्ठा करना महिलाओं का ही काम था। राजा-महाराजाओं के जमाने में जोधपुर में एक काम सबसे अच्छा यह हुआ कि वाल सिटी एरिया को वाटर बॉडीज से सजाया गया था। रानीसर, पदमसर, नाजरजी की बावड़ी, तूरजी का झालरा, गुलाब सागर और फतेहसागर रियासतकालीन देन हैं।
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पत्रिका व्यू
अभिभावक निभाएं दायित्व

बच्चे तो बच्चे हैं। क्रीड़ा इनकी फितरत में है। वे अबोध है और नासमझ भी। जिम्मेदारी तो बड़ों को निभानी होगी। बच्चों के अभिभावकों का यह दायित्व है कि वे अपने बच्चों पर पूरी नजर रखें। अभिभावक अपने बच्चों को यह समझाएं कि वे गहरे पानी में स्नान न करें। ये उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है।