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मुख्यमंत्री गहलोत के गृह जिले में यूरिया नहीं है मारामारी नहीं, जोधपुर जिले में सप्लाई के बाद 5 हजार मीट्रिक टन का स्टॉक

जोधपुर जिले में किसानों के लिए यूरिया की सामान्य आपूर्ति होने से यहां के किसान व प्रशासन यूरिया को लेकर सुकून की स्थिति में है।
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अमित दवे/जोधपुर. प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को मंत्रिमंडल गठन के तुरंत बाद एक बयान में केन्द्र सरकार पर राजस्थान व मध्यप्रदेश के हिस्से का यूरिया पड़ौसी राज्य हरियाणा को देने का आरोप लगाया था। जबकि मुख्यमंत्री के गृह जिले में किसानों को यूरिया आपूर्ति को लेकर बहार है और मांग अनुसार आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में प्रदेश में जहां यूरिया के लिए किसानों की कतारों के समाचार मिल रहे है और यूरिया खाद लेने के लिए मारामारी चल रही है। वहीं जोधपुर जिले में किसानों के लिए यूरिया की सामान्य आपूर्ति होने से यहां के किसान व प्रशासन यूरिया को लेकर सुकून की स्थिति में है।

जिले में रबी सीजन के दौरान 4 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में बुवाई होती है। इसके लिए औसत 30 हजार मीट्रिक टन यूरिया की सप्लाई होती है। इसमें से अब तक 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया मिला है, जिसमें से अभी तक सीजन सप्लाई के बाद करीब 5 हजार मीट्रिक टन का स्टॉक पड़ा है। आगामी दिनों में 3 रैक यूरिया खाद और मिलने वाली है जिससे यूरिया सप्लाई को लेकर कृषि विभाग आश्वस्त नजर आ रहा है। जिले में राष्ट्रीय केमिकल फर्टिलाइजर, इंडियन पोटाश लिमिटेड, टिस्को, एनएफएल, कृभको आदि कंपनियों की यूरिया खाद किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है।


बुवाई क्षेत्र के अनुसार खपत

जिले में रबी सीजन में 4 लाख हैक्टेयर बुवाई क्षेत्र है। बुवाई क्षेत्र के अनुसार यूरिया की खपत होगी। इसमें अधिकांश हिस्सा फलोदी का है। यहां सटीक आंकलन कर मांग के अनुसार यूरिया की मांग की गई, जो उपलब्ध कराया गया, इसलिए किसानों को भी मांग अनुसार आपूर्ति की जा रही है।

सुनिल वीरभान, मैनेजर, क्रय-विक्रय सहकारी समिति, फलोदी

कमी जैसी स्थिति नहीं
जिले में आवश्यकता अनुसार यूरिया की सप्लाई हो रही है। जिसकी नियमित निगरानी कर रहे है। फिलहाल जिले में यूरिया की कमी जैसी कोई स्थिति नही है। किसानों को मांग अनुसार यूरिया दी जा रही है।

बीके द्विवेदी, उप निदेशक, कृषि विस्तार


प्रशासन को मुस्तैद रहना जरूरी

जिले में यूरिया सप्लाई सुचारू रूप से चल रही है । फि लहाल यूरिया की किल्लत जैसी कोई बात नहीं है लेकिन प्रदेश में यूरिया की सप्लाई के कमी का माहौल बनने पर कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए प्रशासन मुस्तैद रहे जिससे किसानों को तय मूल्य पर यूरिया मिलती रहे।
तुलछाराम सिंवर, आंदोलन संयोजक, भारतीय किसान संघ