वन्यजीवों पर मंडराने लगे मौत के संदिग्ध डेरे

वनविभाग का फील्ड स्टाफ भी कतराता है डेरों की तलाशी से

By: Nandkishor Sharma

Published: 26 Jun 2020, 10:18 PM IST

जोधपुर. कोरोनाकाल में खुद का वजूद बचाते हुए संघर्षरत जोधपुर जिले के वन्यजीवों के लिए अब वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में शिकार में माहिर जातियों के अस्थाई तौर पर लगने वाले डेरे घातक साबित हो रहे है। फील्ड स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहे वनविभाग का वन्यजीव उडऩदस्ता अस्थाई डेरों की निगरानी रखने में नाकामयाब साबित हो रहा है। वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में गश्त के अभाव के कारण छोटे पक्षियों सरिसृप आदि वन्यजीवों का लगातार खात्मा होता जा रहा है। जोधपुर जिले के हर तीसरे गांव में अस्थाई संदिग्ध डेरों पर नजर रखने वाला कोई नहीं है। वनविभाग का उडऩदस्ता मुखबिरों और पर्यावरणप्रेमियों की सूचना पर कभी कभार अस्थाई डेरों की तलाशी कर वन्यजीवों को बरामद करता भी है लेकिन अधिकांश मामलों में चालाक शिकारी भारी जुर्माना देकर मामला कम्पाउण्ड (प्रशमन) करने में कामयाब हो जाते है। कई बार वनविभाग के उडऩदस्ते के सदस्यों व अधिकारियों पर भी जानलेवा हमले होने के बाद फील्ड स्टाफ डेरों की तलाशी से कतराते भी है।

पहचान पत्र योजना ठंडे बस्ते में
शिकार में माहिर जाति विशेष के डेरों का सर्वे कर कुछ साल पहले उन्हें पहचान पत्र देने की योजना भी तैयार की गई थी लेकिन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के साथ योजना भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। इस योजना के तहत जोधपुर जिले के वन्यजीव बहुल क्षेत्रों के संदिग्ध डेरों की पंचायतवार फोटाग्राफी और रजिस्टर का संधारण की बात कही गई थी।

इसीलिए देते है डेरा लगाने की इजाजत
आम तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की रखवाली के लिए किसान अपनी फसलों को रोजड़ों (नीलगाय) और मवेशियों से बचाने के लिए शिकार में माहिर खानाबदोश जातियों के लोगों को अपने खेत के आस-पास डेरा लगाने की इजाजत देते है। इसी आड में वन्यजीवों का शिकार होता है। विश्नोई टाइगर्स फोर्स के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल भवाद ने बताया कि संदिग्ध डेरों की जब कभी भी तलाशी ली गई तो अधिकांश मामलों में वन्यजीवों के अवशेष मिले है। इससे वन्यजीवों की खाल व अंगों की तस्करी करने वालों से सांठ गांठ से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। एक दिन पहले ही जोधपुर मुख्यालय से मात्र 17 किमी दूर संदिग्ध लोगों के पास अनुसूचि प्रथम के वन्यजीव सांप, पाटागोह आदि बरामद हुए है। विभाग ने नियमित गश्त की व्यवस्था नहीं की तो विलुप्त प्रजाति के वन्यजीव खत्म हो जाएंगे।

Nandkishor Sharma Desk
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