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लावारिस कजरी की किस्मत ने लिया यू-टर्न, स्वीडन की क्रिस्टीन ने फैलाया ममता का आंचल

जोधपुर से पहली बार कजरी जाएगी सात समंदर पार  
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जोधपुर. आखिर वो दिन आ ही गया। अनाथ बच्चों का पालन पोषण करने वाले नवजीवन संस्थान में आने वाली लावारिस अनाथ बालिका शिक्षा व संस्कारित होने के बाद उनके अच्छे घरानों में विवाह संबंध के बाद विदा होती है लेकिन एक साल की कजरी सोमवार को ही संस्थान से सात समंदर दूर स्वीडन जाने के लिए विदा हो गई। समाज के डर से अज्ञात मां ने जन्म देने के बाद नन्हीं परी कजरी को रेलवे ट्रेक पर मौत के मुंह में फेंक दिया था लेकिन विधाता को उस बेकसूर नन्हीं सी जान की किस्मत पर शायद रहम आ गया। विधाता ने उस नन्हीं परी कजरी के हाथों की किस्मत को रेखाओं को बदल दिया। कजरी की किस्मत में ट्रेन के पहियों के नीचे कुचलना नहीं बल्कि स्वीडन निवासी करोड़पति क्रिस्टिना की ममता और प्यार लिखा था। किस्मत के अनूठे कनेक्शन को जोडऩे में महत्वपूर्ण कड़ी जोधपुर के प्रमुख समाजसेवी राजेन्द्र परिहार रहे। बाड़मेर रेलवे स्टेशन के पास पटरियों के बीच स्लीपर पर 16 अगस्त 2017 को कजरी को मरने के लिए फेंक दिया था। लेकिन इसे कुदरत का करिश्मा कहे या संयोग वहां से गुजरते हुए एक व्यक्ति ने बच्चे की किलकारी को सुना तो उसे एक बार तो यकीन ही नहीं हुआ। रेल की पटरियों के पास जाकर देखा तो एक नवजात पड़ी थी। उसने तुरंत जाकर रेलवे पुलिस को सूचित किया।

रेलवे पुलिस पहुंचकर नवजात कजरी को कब्जे में लिया और जिंदा देखकर उसे बाड़मेर पुलिस के माध्यम से राजकीय अस्पताल पहुंचाया। लेकिन नवजात बालिका की गंभीर स्थिति देखते हुए उसे जोधपुर रेफर किया गया। बाड़मेर पुलिस उसे लेकर संभाग के सबसे बड़े अस्पताल उम्मेद पहुंची। बालिका कजरी की हालत में सुधार होने के बाद उसे अनाथ बच्चों को नया जीवन देने वाले नवजीवन संस्थान के संचालक राजेन्द्र परिहार को सुपुर्द कर दिया। नवजीवन संस्थान में तीन दिन की बालिका को नाम दिया गया कजरी। कजरी जब चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित नवजीवन संस्थान पहुंची तो उसका वजन डेढ़ किलो से भी कम था। संस्थान में अन्य अनाथ बच्चों के साथ उसका भी पालन पोषण होने लगा। इस बीच स्वीडन निवासी 45 वर्षीय अविवाहित एलिन क्रिस्टीन एरिसन ने जब इंटरनेट पर कजरी को देखा तो उसे अपनी बेटी बनाने का निश्चय किया। इसके लिए स्वीडन की एडोप्शन चिल्ड्रन अबव ऑल को अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण के लिए निर्धारित प्रक्रिया व मापदंड पूरे करने के बाद 23 जनवरी 2018 के दिन आवेदन किया। पारिवारिक न्यायालय में जोधपुर में 14 जून को प्रार्थना पत्र पेश कर मंजूरी प्राप्त की है। एलिन की वार्षिक आय 38 लाख 14 हजार 196 यूएस डॉलर है।

जोधपुर में पहली बार ऐसा मामला


स्वीडन की महिला एलिन की ओर से कजरी को गोद लेने का मामला जोधपुर में पहली बार इंटर कंट्री एडोप्शन का मामला होगा। गोद देने की पूरी प्रक्रिया भी पारिवारिक कोर्ट के मार्फत की गई। नवजीवन संस्थान के संचालक राजेन्द्र परिहार ने बताया कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन सेन्ट्रल एडोप्शन रिसोर्स ऑथीरिटी के माध्यम से इंटर कंट्री एडोप्शन की प्रक्रिया पूरी होती है। इसमें भारतीय लोगों को अनाथ बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया अलग है। सख्त जांच प्रक्रिया से गुजरने के बाद 32 तरह के डॉक्यूमेंट्स सौंपने पर ही बच्चा गोद दिया जाता है।

कजरी को मिली क्रिस्टीन की ममता


स्वीडन निवासी 45 वर्षीय अविवाहित एलिन क्रिस्टीन एरिसन रविवार को चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित नवजीवन संस्थान पहुंची और कजरी को कई घंटों तक गोद में खिलाकर अपनी ममता लुटाई। कजरी को स्वीडन निवासी 45 वर्षीय अविवाहित एलिन क्रिस्टीन ने गोद ले लिया है। एलिन ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि वो कजरी को पाकर बेहद खुश है। उसने बच्चों के लालन पालन का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लिया है। एलिन की ओर से कजरी को गोद लेने का मामला जोधपुर में पहली बार इंटर कंट्री एडोप्शन का मामला होगा। परिहार ने बताया कि सोमवार को कजरी को सुपुर्द की गई।