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स्वाइन फ्लू का प्रकोप है, यह दवा बाहर से ले लेना

- पत्रिका स्टिंग में उजागर हुई चिकित्सकों की लापरवाही और कथित मिलीभगत - पीएचसी के चिकित्सक लिख रहे बाहर की दवाएं
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Swine flu in Jodhpur, Medicine not in hospital

स्वाइन फ्लू का प्रकोप है, यह दवा बाहर से ले लेना

अरविंद सिंह राजपुरोहित. जोधपुर.

यदि आप शहर के वेस्ट जोन में स्थित किसी शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सरकारी सुविधा की आस लिए इलाज करवाने जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। आपको जल्दी स्वस्थ होना है तो अस्पताल से बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ेगी, वरना सरकारी इंजेक्शन से मर्ज ठीक हो जाए इसकी कोई गारंटी नहीं। एेसा हम नहीं बल्कि चिकित्सक मरीजों को कह रहे हैं। और तो और बिना अनुभव वाले कर्मचारी मरीजों को दवाइयों का वितरण भी कर रहे हैं। पत्रिका टीम के इस स्टिंग में जानिए कि चिकित्सक कैसे मरीज और सरकार की मंशा से खिलवाड़ कर रहे हैं।

केस:1- मधुबन पीएचसी : निजी मेडिकल स्टोर से दवा लाने की मजबूरी-

सुबह करीब दस बजे मरीज बारी-बारी से चिकित्सक के पास जांच के लिए आ रहे थे। पत्रिका टीम पहुंची तो कक्ष में बैठे चिकित्सक मरीजों को चिकित्सा केंद्र की पर्ची के साथ ही पास में ही रखी अन्य पर्ची पर दवाइयां लिखकर दे रहे थे। जबकि अस्पताल में नि:शुल्क दवा काउंटर भी है। कई मरीज तो बाहर से दवाइयां लाकर चिकित्सक को दिखा भी रहे थे।

6 टैबलेट्स की कीमत 126 रुपए

टीम यहां डमी मरीज के साथ काउंटर से पर्ची लेकर चिकित्सक के कक्ष में दाखिल हुई। डमी मरीज ने चिकित्सक को सिर दर्द और जुकाम होने की बात कही। चिकित्सक ने सरकारी पर्ची पर चार दवाइयां लिखी। एक अन्य पर्ची पकड़ा दी और कहा कि स्वाइन फ्लू का प्रकोप ज्यादा है, इसलिए यह दवाई बाहर से ले लेना। टीम ने मेडिकल स्टोर से इसकी कीमत पता की तो १२६ रुपए बताई गई।

केस 2 : बासनी पीएचसी : एक ही मर्ज के इलाज में अंतर-

टीम ने यहां पर भी वही बीमारी बताई जो मधुबन पीएचसी पर बताई थी। चिकित्सक ने स्वास्थ्य केंद्र की पर्ची पर दवाई लिखकर दी। यहां चिकित्सक ने डमी मरीज की जांच भी की। जबकि मधुबन स्वास्थ्य केंद्र पर बैठे चिकित्सक ने ६ से अधिक निशुल्क दवाओं के अलावा बाहर से लाने को अलग दवाइयां लिखकर दी थी।

फार्मासिस्ट नहीं-

टीम दवा काउंटर पर पहुंची तो पर्ची काटने वाली कर्मचारी ही दवा दे रही थी। जबकि नियमों के हिसाब से फॉर्मासिस्ट ही पर्ची के आधार पर दवा दे सकता है। इस बारे में पीएचसी प्रभारी डॉ. सुल्तान से पूछने पर वह टालमटोल करने लगे।

केस- 3 झालामंड पीएचसी : बिना जांच लिख दी दवाई

यहां पत्रिका संवाददाता ने चिकित्सक को पेट दर्द की तकलीफ बताई। इस पर चिकित्सक ने बिना जांच किए स्वास्थ्य केंद्र की पर्ची पर कुछ दवाइयां लिखकर दे दी। एक अन्य मरीज कालूराम ने बताया कि उसे भी बिना जांच के ही कमर दर्द की दवाइयां लिख दी। पर्ची लेने के बाद टीम जब दवा काउंटर पर दवाइयां लेने के लिए पहुंची तो यहां भी पर्ची काटने वाला युवक ही दवाइयां दे रहा था।

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कार्रवाई के निर्देश देंगे

'सीएमएचओ को लापरवाह चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देंगे। मरीजों के साथ इस तरह का खिलवाड़ गलत है।

-मनीषा पंवार, विधायक जोधपुर शहर

बाहर की दवा लिखकर नहीं दे सकते-
'स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक बाहर की दवाइयां (ब्रांडेड) लिखकर नहीं दे सकते। बाहर की दवाइयां लिखने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। झालामंड, बासनी पीएचसी में फॉर्मासिस्ट नहीं हैं।

-डॉ. बलवंत मंडा, सीएमएचओ