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Good News: IIT ने की बड़ी खोज, थार में 4 इकोसिस्टम, सभी 33 जिलों में मौजूद

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने पहली बार थार मरुस्थल को जैविक आधार पर 4 पास्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम/इकोरीजन) में विभक्त किया है

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जोधपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने पहली बार थार मरुस्थल को जैविक आधार पर 4 पास्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम/इकोरीजन) में विभक्त किया है। थार इकोसिस्टम में अरावली, हाड़ौती का पठार और पूर्वी मैदान शामिल है। इसके लिए यहां पाई जाने वाली पक्षियों की 492 प्रजातियों को आधार बनाया गया है।

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वर्तमान में वर्ल्ड वाइल्ड फण्ड (डब्ल्यूडब्ल्यएफ) थार को केवल एक रेगिस्तानी इकोसिस्टम मानता है, जिसकी वजह थार प्रदेश वैश्विक सरंक्षण के लिए आने वाले 246 इकोसिस्टम में शामिल नहीं है, जबकि थार से काफी कम जैव विविधता वाले मध्य एशिया के 6 रेगिस्तान को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। गौरतलब है कि वर्तमान में थार मरुस्थल का केवल भौगोलिक आधार पर विभाजन किया गया है, जिसमें पश्चिमी राजस्थान के 12 जिले शामिल है। इसमें पश्चिमी रेतीला मैदान, अर्ध शुष्क प्रदेश, नागौरी उच्च भूमि और घग्घर का मैदान शामिल है।

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4 भागों में बांटा थार इकोसिस्टम

1. पश्चिमी थार : बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर व चूरू (5 जिले)

2. ट्रांजिशनल जोन : जालोर, सिरोही, नागौर, सीकर, झुंझनूं, राजसमंद, भीलवाड़ा, बूंदी, प्रतापगढ़, दौसा, धौलपुर, करौली, टोंक (13 जिले)

3. पूर्वी थार : उदयपुर, पाली, चितौडग़ढ, अजमेर, जयपुर, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, कोटा (9 जिले)

4. सिंचित जोन : डूंगरपुर, बांसवाड़ा, बारां, झालावाड़, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ (6 जिले)


सर्वाधिक जैव विविधता जोधपुर में

प्रदेश के भरतपुर, सवाई माधोपुर, जोधपुर और जैसलमेर में उच्च जैव विविधता पाई जाती है, जबकि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में सबसे कम है। आइआइटी के अनुसार सिंचित जोन में जैव विविधता लगातार घट रही है जो चिंता का कारण है। इस शोध में आइआइटी जोधपुर की बायोसाइंस व बायोइंजीनियरिंग विभाग की एचओडी प्रो मिताली मुखर्जी, कम्प्यूटर साइंस विभाग के डॉ अंगशुमन पॉल और जोधपुर सिटी नॉलेज इनोवेशन फाउण्डेशन की डॉ. मानसी मुखर्जी शामिल है। इन्होंने अपने शोध के लिए क्राउडसोर्स बर्ड डाटा का इस्तेमाल किया। शोध साइंस डायरेक्ट पत्रिका ने प्रकाशित किया है।


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