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18 वर्षीय मृतक के शरीर में थी यह चीज, नहीं निकालते तो हो जाता धमाका

-अन्तिम संस्कार से पहले पोस्टमार्टम कक्ष में शव से निकाली यह चीज, बचाया बड़ा हादसा -मेल नर्स अरविन्द अपूर्वा ने साहसिक प्रयास करते हुए मृतक के शरीर से यह चीज निकाल दी और लोगों को बड़े हादसे से बचा लिया
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The 18-year-old was dead, Pacemaker news

18 वर्षीय मृतक के शरीर में थी यह चीज, नहीं निकालते तो हो जाता धमाका

जोधपुर.
18 वर्षीय मृतक युवक के शरीर से यह चीज नहीं निकाली जाती तो अन्तिम संस्कार के समय बड़ा धमाका हो जाता है और इस धमाके में कई लोगों को बड़ा नुकसान हो सकता था। लेकिन शहर मेल नर्स अरविन्द अपूर्वा ने साहसिक प्रयास करते हुए मृतक के शरीर से यह चीज निकाल दी और लोगों को बड़े हादसे से बचा लिया।
शहर के मथुरादास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक आईसीयू में भर्ती 18 वर्षीय किशनाराम की रविवार सुबह उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। जैसलमेर जिले के थयात गांव निवासी किशनाराम को मल्टी ऑर्गन डिजीज थी। इसी वर्ष 7 जनवरी को एमडीएम की कैथ लेब में डॉ. रोहित माथुर ने कृत्रिम पेसमेकर लगाया था। ज्ञात है कि हृदय गति कम (बेडिकार्डिया) होने पर कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक नामक बीमारी की अवस्था में मरीज को कृत्रिम पेसमेकर लगाया जाता है। मरीज की मृत्यु के बाद अग्नि दाह के समय इस कृत्रिम पेसमेकर की ड्राई बैटरी से ब्लास्ट हो सकता है। इस दौरान पास अन्तिम यात्रा में भाग लेने वाले परिजन व अन्य लोगों को भी नुकसान की संभावना बनी रहती है।

जानकारी के अभाव में जोधपुर में दो बार ऐसी स्थिति में विस्फोट हो चुका है। संबंधित चिकित्सक की ओर से परिजन को ऐसे मरीज की मृत्यु के उपरांत इस कृत्रिम पेसमेकर को रिमूव करवाने की अग्रिम जानकारी दी हुई होती है। किशनाराम की मृत्यु की जानकारी जब परिजन को हुई तो उन्होंने आईसीयू में ड्यूटी पर कार्यरत डॉक्टर एवं नर्सेज से पेसमेकर निकलवाने का कहा। आईसीयू से महात्मा गांधी अस्पताल के मेल नर्स श्रेणी प्रथम अरविन्द अपूर्वा को सूचना दी गई। अरविन्द ने समस्त तैयारी के साथ तुरंत एमडीएम हॉस्पीटल पहुंच कर मृतक किशनाराम के शव से कत्रिम पेसमेकर निकाल कर परिजन को सुपुर्द किया। जिसे संबधित कंपनी या केथ लेब को सौंपा जाएगा। ताकि इसका विधिवत डिस्पोजल किया जा सके। इसके बाद परिजन शव लेकर जैसलमेर जिले स्थित अपने गांव थयात रवाना हुए।


अब तक 45 पेसमेकर निकाले-
मेल नर्स अरविंद अपूर्वा पिछले 24 वर्ष से शव से पेसमेकर रिमूव करने की नि:शुल्क सामाजिक सेवा दे रहे हैं। अब तक अरविन्द 45 से अधिक शवो से कत्रिम पेसमेकर रिमूव कर चुके है। इस बार अरविन्द अपूर्वा ने कार्डियोथोरेसिक आईसीयू में कार्यरत दो नर्सेज को भी इस कार्य हेतु प्रशिक्षित किया। शव से कत्रिम पेसमेकर रिमूवल एक विशेष जिम्मेदारी की एवं साहसिक सेवा है। अरविन्द ने शव से पेसमेकर रिमूवल की सूचना डॉ. रोहित माथुर को भी दी।