
बच्चा टीक कर नहीं बैठता... हो सकती है एडीएचडी बीमारी
जोधपुर.जोधपुर. अक्टूबर महीने में पूरी दुनिया में अटैंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए चर्चा की जाती है। इसे एडीएचडी के नाम से भी जाना जाता है। एडीएचडी एक तंत्रिका-विकासात्मक विकार है। बच्चे के विकास संबंधित कारणों या रसायनिक असंतुलन से यह बीमारी होती है। जिसमे उनके दिमाग का विकास सुचारू तरह से नहीं हो पाता है। किसी स्कूल में यदि 1000 बच्चे पढ़ रहे है तो उनमें से सामान्यतया 50 से 70 बच्चे इस बीमारी से ग्रस्त होते है।
एडीएचडी से ग्रसित बच्चे काफी ज्यादा चहल-कदमी करते है। एक जगह टीक कर नहीं बैठ पाते। इसलिए अधिकतर समय उनके स्कूल से भी शिकायत आती है कि बच्चा पढ़ाई कम एवं शैतानी ज्यादा करता है, और बच्चों को भी परेशान करता है। ये बच्चे किसी चीज में ध्यान लगाने या पढ़ाई में या एकाग्र होने में भी काफी मुश्किल महसूस करते है। साथ ही साथ यह बच्चे सोचे-समझे बगैर कुछ भी कर बैठते है। काफी उतावले होते है। इसी कारण अधिकतर जगह (स्कूल, घर, पड़ोस या मोहल्ले में) उनसे लोग परेशान रहते है।
मनोचिकित्सक से ले सकते है परामर्श
एम्स जोधपुर के मनोचिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ. नरेश नेभिनानी ने बताया कि मनोचिकित्सक एवं मनोवैज्ञानिक से परामर्श लेकर हम इस बीमारी की बच्चों में सही समय पर पहचान कर सकते हैं। उचित इलाज व सटीक दवाइयां लेकर बच्चे के संतुलित विकास में भी गति दे सकते हैं। तकरीबन 50 प्रतिशत एडीएचडी से ग्रस्त बच्चों में यह लक्षण एवं परेशानियां व्यस्क अवस्था में भी देखी जाती है। मशहूर हस्तियां (माइकल फेल्प्स- मशहूर तैराक, वाल्ट डिज़्नी- डिज़्नीलैंड के संस्थापक) जैसे भी इस बीमारी से ग्रस्त रहे है। सही इलाज के बाद काफी सफल हुए।
29 को एम्स में कार्यशालामनोचिकित्सा विभाग एम्स जोधपुर ने ओपीडी में आने वाले सारे मरीजों एवं परिवारजनों को एडीएचडी के बारे में जागरूक करने के लिए शॉर्ट वीडियो बनाया है। जो ओपीडी पंजीकरण एवं वेटिंग एरिया में समस्त एलइडी स्क्रीन पर प्रसारित किया जाएगा। साथ ही 29 अक्टूबर- को मनोचिकित्सा विभाग एम्स जोधपुर के मनोचिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर्स, फैकल्टी, एडीएचडी से ग्रसित बच्चों के परिजनों के लिए पैरेंट स्कील कार्यशाला भी आयोजित करेगा।
Published on:
26 Oct 2022 08:47 pm
