
जोधपुर हादसे में उपकरण ने ऐसे खोज निकाला मलबे में दबे हुए लागों को
- हार्ट बीट सेंसर से तलाशी मलबे में दबी जिन्दगी
जोधपुर . सरदारपुरा बी रोड स्थित तीन मंजिला इमारत गिरने के बाद तत्काल मौके पर पहुंचे नागरिक सुरक्षा दस्ते और एसडीआरएफ के जवानों की फुर्ती व मुस्तैदी से तीन जिन्दगियां बच गई। जिला कलक्टर के आदेश पर एसडीआरएफ के कम्पनी कमाण्डर गुलाबाराम के नेतृत्व में चालीस जवान तत्काल मौके पर पहुंचे। तब तक नागरिक सुरक्षा दस्ता राहत कार्य में जुटा था और दुकान संचालक को बाहर निकाल लिया था। एसडीआरएफ के जवानों ने बड़े पत्थर और मलबा हटाने में मदद की। एसडीआरएफ के पास हार्ट बीट सेंसर मापने का एक उपकरण भी था। यह उपकरण मलबे में फंसे किसी भी व्यक्ति के दिल की धड़कन को भांप लेता है और तीर से इंगित करता है कि मलबे में कोई भी व्यक्ति कहां फंसा हुआ है। इसकी मदद से ही मलबे में दबे दो लोगों के बारे में पता चला।
उप नियंत्रक (नागरिक सुरक्षा) रामदीन चौधरी ने बताया कि जिला कलक्टर के आदेश पर आठ कार्यकर्ता तुरंत घटनास्थल पहुंच गए। फिर दो दर्जन और कार्यकर्ताओं को बुलाया गया। प्रशिक्षित कार्यकर्ता महेन्द्र जाणी व राकेश चौधरी के साथ अन्य स्वयं सेवकों ने आधे घंटे के भीतर संजय जैन को बाहर निकाल लिया। कुछ देर बाद अन्य दोनों को भी निकाला गया। नगर निगम के सहायक अग्निशमन अधिकारी नितीश भारद्वाज के नेतृत्व में दमकल कर्मियों ने भी राहत कार्य में सहयोग किया।
किशोर को कंधे पर बिठाकर बाहर लाया
दो जनों को बाहर निकालने के बाद एक किशोर अंदर बचा था। वो हाथ हिलाकर व चिल्लाकर खुद को बाहर निकालने का आग्रह कर रहा था। उसके ऊपर पत्थर के भारी भरकम पाट टिके हुए थे। पास ही काउंटर होने से बाहर निकालने में परेशानी हो रही थी। काउंटर को कटर मशीन से काटकर जगह भी बनाई गई। एसडीआरएफ का एक जवान उसे बचाने के लिए अंदर उतरा और माधव सिंह को कंधे पर बिठाकर बाहर लाया।
Published on:
23 May 2018 04:40 pm
