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जनता की राय से बनेगा मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कानून

-जनता के दरबार पहुंचा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग -चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए जनता से मांगे सुझाव -15 से 31 मार्च तक मांगे सुझाव, जनता की राय के अनुरूप सख्त कानून के लिए तैयार होगा प्रस्ताव
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The law of food safty be made from the public opinion, Adulterant

जनता की राय से बनेगा मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कानून

के. आर. मुण्डियार

जोधपुर.

प्रदेश भर में फूड प्रोडक्ट में मिलावट को रोकने की प्रवृति पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार जनता के दरबार पर फैसला छोड़ा है। अब जनता की राय व सुझाव के बाद राज्य सरकार की ओर से मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाएगा।

संभवत: विभाग की यह नई पहल है कि मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई व कानून बनाने के लिए आमजन से सुझाव देने का आग्रह किया गया है। विभाग ने अपनी मेल आइडी ( foodsaftyvoice2019@gmail.com) जारी करते हुए आमजन से 31 मार्च तक मेल आइडी पर उनकी राय, सुझाव व विचार आमंत्रित किए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक (जन स्वास्थ्य) एवं खाद्य सुरक्षा के आयुक्त ने 14 मार्च को प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आमजन के सुझाव के आमंत्रित कराने के निर्देश दिए हैं।

आयुक्त के अनुसार प्रदेश भर में मिलावटखोरी के खिलाफ महकमे की ओर से समय-समय पर कार्रवाइयों को अंजाम दिया जा रहा है। आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई भी होती है। इसके बावजूद मिलावटखोरी के आरोप में पकड़े जाने वाले आरोपियों के हौसले कम नहीं हो रहे हैं। इसलिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के पक्ष में आमजन से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, ताकि आम जनता बता सकती है कि मिलावटखोरों से कैसे निपटा जा सकता है। ऐसे कौनसे प्रयास किए जाएं कि प्रदेश में मिलावटखोरी की गतिविधियों पर पूरी अंकुश लग सके।

जनता से यह भी सुझाव मांगा गया कि वर्तमान में मिलावटखोरी के खिलाफ जो कानूनी कार्रवाई हो रही है, क्या उस कानून में भी सख्ती लाई जानी चाहिए। विभाग की मंशा है कि जनता से जो फीडबैक व सुझाव मिलेगा, उसके अनुरूप मिलावटखोरी के विरूद्ध सख्त कानून बनाए जाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जाएगा। गौरतलब है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से वर्तमान में मिलावटखोरी के खिलाफ कार्रवाई के लिए फूड सेफ्टी एवं स्टैण्डर्ड एक्ट-2006 के तहत कार्रवाई की जा रही है।