
बेसहारों की सेवा के अनूठे 'अनुबंध को पूरे हो रहे 19 साल
जोधपुर. जोधपुर शहर से करीब 12 किमी दूर मण्डोर नागौर रोड के निम्बा नीम्बड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक पहाडिय़ों से घिरे शान्त वातावरण में स्थित वृद्धजन कुटीर 'अनुबंधÓ बिना किसी जाति - धर्म के जरूरतमंद मानव सेवा के अनुबंध के 19 साल 25 नवम्बर को पूर्ण कर 20 वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। जोधपुर में निराश्रित जरूरतमंद वृद्धजन के लिए इससे बढ़कर कोई स्थान नहीं है जहां अनुराधा अडवानी बिना किसी सरकारी मदद के बेगानों की बेमिसाल सेवा में जुटी है। वर्तमान आपाधापी भरी जिंदगी में इंसान के सुख का दायरा सीमित हो चुका है ऐसे में निराश्रित वृद्धजनों के लिए संचालित वृद्धजन कुटीर एक अचम्भित करने वाली सच्चाई है । करीब 80 से अधिक वृद्धजनों के परिवार के लिए बेटी बन चुकी अनुराधा अडवाणी जो न तो इनकी सेवा करते वक्त माथे पर कोई शिकन लाती है और ना ही आश्रम के किसी सदस्य की आंख में कभी आंसू आने देती है ।
अनुबंध परिवार में दिव्यांग व असामान्य बुजुर्ग
संस्थान में देश के विभिन्न राज्यों के दिव्यांग, लकवाग्रस्त सहित मानसिक व शारीरिक रूप से असामान्य बुजुर्ग भी है । आश्रम में कुल 80 से अधिक बुजुर्ग है जो रोजाना शाम को शीतल सौम्य वातावरण में भजन, टीवी पर पौराणिक धारावाहिक, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन और सौहाद्र्रपूर्ण वातावरण में अपनी रूचि के अनुसार कैरम, शतरंज, ताश खेलते है। कई बुजुर्ग वेस्ट चीजों को आकार देकर कई कलात्मक चीजे भी बनाते है। आश्रम संचालक अनुराधा अडवानी कहती है कि आश्रम में किसी से कोई जाति नहीं पूछी जाती है लेकिन विडम्बना यह है कि मौत के बाद भी लोग अंतिम संस्कार के समय जाति पूछते है। इसीलिए हमने आश्रम परिवार के किसी भी सदस्य के देवलोकगमन पर आर्य समाज की ओर से ही दाह संस्कार करवाते है जो कास्ट नहीं पूछते है। शायद यही कारण है कि अनुबंध आश्रम में प्रवेश के लिए सदस्य की योग्यता में बगैर जाति पूछे शारीरिक रूप से असक्षम, चलने फिरने में लाचार होना रखा गया है।
कोविडकाल में बढ़ गई थी जिम्मेदारी
वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान 'अनुबंध का विशाल परिवार 16 मार्च 2020 से ही खुद को लॉकडाउन किए हुए था। असंभावित खतरों के साए के बीच सीमित संसाधनों और भरपूर सेवा भावनाओं से आश्रम के सेवादारों की टीम बुजुर्गो की 24 घंटे देखरेख में जुटी रही। अनुराधा ने बताया कि लॉकडाउन में घर से आश्रम तक प्रतिदिन पहुंचने के दौरान वीरान रास्तों का सफर मुश्किल जरूर था। कुछ लोगों ने डराया तो कुछ ने हिम्मत भी बंधाई लेकिन ईश्वरीय कृपा से कोरोनाकाल में कोई दुखद घटना नहीं हुई।
19 साल से सेवाएं दे रही बुजुर्ग नाथी
वर्ष 2002 में आश्रम की शुरुआत के प्रथम दिन से बुजुर्ग महिला नाथी बाई लगातर आश्रम में वृद्धजनों की सेवा में दिन रात जुटी है। बुजुर्गों की सेवा कार्यो को ईश्वरीय सेवा मानने वाली नाथी खुद अब जीवन के 60 बसंत पार चुकी है।
व्यक्तिगत संसाधनों से ही चलता है आश्रम
सन 2002 में निर्मित व स्थापित वृद्धाश्रम आश्रम न होकर वृद्धजन कुटीर है। थियेटर आर्टिस्ट, एक्टर, राइटर अनुराधा अडवानी की ओर से संचालित आश्रम पूरी तरह नि:शुल्क है और गैर राजकीय है। स्वेच्छा से यदि कोई समाजसेवी अथवा संस्था सहयोग करती है तो उसकी मनाही नहीं है।
आमजन के लिए नि:शुल्क क्लिनिक
अनुबंध वृद्धजन कुटीर में कुल दो चिकित्सालय है जिनमें एक आश्रम आवासित बुजुर्गो के लिए तो दूसरा आमजन के लिए है। सुबह 9 से 12 तक संचालित नि:शुल्क क्लिनिक में चिकित्सकीय परामर्श, नर्सिंग सेवाएं, ईसीजी, शुगर जांच, पल्स, बीपी और ऑक्सीजन जांच, बफारा, डे्र्र्रसिंग व आवश्यक दवाइयां नि:शुल्क है।
Published on:
24 Nov 2021 07:13 pm
