scriptThe work of the radiologist, was put to see the normal patient | काम रेडियोलॉजिस्ट का, लगा दिया सामान्य मरीज देखने! | Patrika News

काम रेडियोलॉजिस्ट का, लगा दिया सामान्य मरीज देखने!

 

 

-आचार संहिता में आई चिकित्सकों की तबादला सूची की व्यावहारिकता पर भी सवाल

जोधपुर

Updated: August 22, 2021 10:19:39 pm

इनडेफ्ट स्टोरी

अभिषेक बिस्सा

जोधपुर. पंचायत चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद तबादलों के कारण विवादों में आई चिकित्सा अधिकारियों की सूची की तकनीकी खामियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। चिकित्सा विभाग ने विशेषज्ञता वाले कई चिकित्सकों के तबादले ऐसी जगहों पर कर दिए हैं, जहां उनकी विशिष्टता का कोई उपयोग ही नहीं हो सकेगा। रेडियोथैरेपी और पैथोलॉजी के चिकित्सकों को ऐसे अस्पतालों या डिस्पेंसरी में पदस्थापित कर दिया गया है, जहां उनके लायक काम ही नहीं है।
काम रेडियोलॉजिस्ट का, लगा दिया सामान्य मरीज देखने!
काम रेडियोलॉजिस्ट का, लगा दिया सामान्य मरीज देखने!
हालांकि राज्य चुनाव आयोग ने जोधपुर समेत उन छह जिलों में हुए चिकित्सकों के तबादलों पर रोक लगा दी है, जहां इसी महीने तीन चरणों में जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव हो रहे हैं, लेकिन जानकारों इस बात पर हैरत है कि एमआरआइ, सोनोग्राफी व सीटी स्कैन जैसे कार्यों में एक्सपर्ट चिकित्सकों को खांसी, जुकाम व बुखार के मरीजों के इलाज के लिए लगाया गया है। नॉन क्लिनिकल चिकित्सकों को भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर स्थानांतरित किया गया है। हालांकि चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद सूचियां तारीख आदि से संशोधित होने के आसार हैं, लेकिन विशेषज्ञता के आधार पर संशोधन की संभावना कम ही जताई जा रही है।
केस-1
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ( गु्रप-2) विभाग से गत 14 अगस्त को जारी आदेश के तहत रेडियोडाइग्नोसिस के एक चिकित्सक को उप जिला चिकित्सालय, निम्बाहेड़ा (चितौडगढ़़) से राजकीय डिस्पेंसरी, नागौरी गेट, जोधपुर में लगाया गया है। जबकि इस चिकित्सक के लायक डिस्पेंसरी में काम ही नहीं है। जानकारों का कहना है कि इस चिकित्सक को जोधपुर में ही किसी दूसरे बड़े अस्पताल में लगा दिया जाता तो मरीजों को उनकी सेवाओं का लाभ मिलता।
केस-2

इसी तारीख को जारी आदेश में एक पैथोलॉजिस्ट चिकित्सक को उप जिला अस्पताल बालोतरा (बाड़मेर) से पहले जोधपुर के जिला अस्पताल, पावटा में लगाया गया और बाद में आदेश में संशोधन कर पीएचसी, फिदूससर लगा दिया गया। पैथोलॉजिस्ट नॉन क्लिनिकल चिकित्सक की श्रेणी में आते हैं, उन्हें क्लिनिकल सेंटर में लगाने पर सवाल उठ रहे हैं।
नाम के जिला व सैटेलाइट अस्पताल

जोधपुर में एम्स और डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के बड़े-बड़े अस्पताल हैं। पिछली सरकार ने जिला व सैटेलाइट अस्पतालों को भी मेडिकल कॉलेजों के अधीन कर दिया। ये अस्पताल अभी भी सुचारू रूप से संचालित नहीं है। यहां कई कमियां हैं। इमरजेंसी में यहां अभी भी रात्रि में मरीज नहीं पहुंचते। अक्सर रात में यहां चिकित्सक मिलते ही नहीं हैं। राज्य सरकार ने इन्हें सैटेलाइट व जिला अस्पतालों का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन इसके अनुरूप सुविधाएं ही नहीं है। आज भी लोग आपात स्थिति में बड़े अस्पतालों का ही रुख करते हैं।
अफसर भी बेबस

अव्यावहारिक तबादलों से बड़े अफसर भी बेबस हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवार्ओं के संयुक्त निदेशक डॉ. जोगेश्वर ने इस बारे में पूछने पर इतना ही कहा कि वे मामले को दिखवाते हैं और इसके बाद ऊपर भी बात करेंगे।

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