
JNVU---ये खेल मैदान नहीं, जंगल है, कैसे तैयार होंगे खिलाड़ी ?
जोधपुर।
पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) का खेल मैदान अपनी बदहाल स्थिति पर आंसू बहा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीनता व अनदेखी की वजह से मैदान की दशा देखकर लगता है कि यह खेल मैदान नहीं बल्कि एक जंगल है। ऐसे में खिलाडिय़ों को खेलने के लिए अच्छा वातावरण नहीं मिलेगा तो वे कैसे राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल लाएंगे।
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खेल मैदान की दुर्दुशा
- विवि के खेल मैदान पर रनिंग ट्रेक क्षतिग्रस्त है, ट्रेक पर कंकड़ व कांटें होने के कारण धावकों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है। मैदान में कंटीली झाडिय़ां बाधा बनी हुई है।
- फुटबॉल मैदान में घास नहीं होने के कारण खिलाडिय़ों को खेलने के दौरान रेत उडऩे के कारण अस्थमा की शिकायत होने की आशंका रहती है।
- वालीबॉल खेल मैदान में भवन निर्माण सामग्री का मलबा पड़ी रहने के कारण वहां खेलना संभव नहीं है।
- खो-खो खेल मैदान में अनावश्यक रूप से कंटीली घास उगी हुई है। लंबी कूद ट्रेक कठोर होने के कारण जम्प के दौरान खिलाड़ी के चोटिल होने की आशंका रहती है।
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ये भी बाधाएं
खेल मैदान में दर्शकों के बैठने के लिए बनाई गई पत्थर के बेंचे टूटी हुई है। इसके अलावा खिलाडिय़ों के लिए न तो स्वच्छ पानी पीने की व्यवस्था है ना ही शौचालय की। महिला खिलाडिय़ों के लिए चेंजिंग रूम की जगह नहीं है, गल्र्स टूर्नामेंट होने की स्थिति में महिला खिलाडिय़ों को ड्रेस चेंजिंग के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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कुलपति ने कार्यकाल संभालने के बाद से लेकर आज तक विश्वविद्यालय के खेल मैदान की सुध नहीं ली है। अगर जल्दी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा खेल मैदानों की दशा सुधारने के लिए कोई उचित प्रयास नहीं किए गए तो बुधवार को होने वाली सिंडिकेट की बैठक में उग्र प्रदर्शन करेंगे।
भूपेंद्रसिंह राठौड़, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष
शारीरिक शिक्षा विभाग, जेएनवीयू
Published on:
03 Feb 2021 09:46 am
