
ट्रेफिक पुलिस की यूनिफॉर्म पर भी तीसरी आंख, उलझे तो पडेग़ा भारी
जोधपुर.
चालान काटने पर लोग कई बार ट्रेफिक पुलिसकर्मियों से झगड़ा करने पर आमादा हो जाते हैं। झूठे आरोप लगाकर अधिकारियों से शिकायत करते हैं। कई बार मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है। ऐसे विवाद से बचने के लिए पुलिस मुख्यालय की ओर सभी जिलों में ट्रेफिक पुलिसकर्मियों को एक माह पूर्व 26 कैमरे दिए गए थे। मोबाइल से छोटे आकार के कैमरे से पुलिसकर्मी की ड्यूटी के दौरान की हर घटना रिकॉर्ड होगी। रिकॉर्डिंग के आधार पर ट्रेफिक पुलिस से उझलने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी और ट्रेफिक पुलिसकर्मी भी ड्यूटी की जगह नहीं छोड़ पाएंगे न ही रिश्वत ले पाएंगे। शहर में ट्रेफिक पुलिसकर्मियों के कैमरे प्रयोग में लेने के बाद गत एक माह में एक भी विवाद नहीं हुआ।
एडीसीपी (ट्रेफिक) निर्मला विश्नोई ने बताया कि ट्रेफिक पुलिसकर्मियों (traffice police )को ड्यूटी के दौरान कई सावधानियां बरतनी पड़ती थी। बिना हेलमेट के बाइक सवार, बिना सीट बेल्ट के कार और गलत साइड से आने वाले वाहन चालकों के चालान काटने पर चालक पुलिसकर्मियों से उलझ जाते थे। विवाद बढऩे पर कई बार कोर्ट में शिकायत करते थे। लोग आरोप लगाते थे कि उन्होंने हेलमेट पहन रखा था, सीट बेल्ट लगा रखी था, इसके बावजूद ट्रेफिक पुलिसकर्मियों ने चालान काट दिया और अभद्र व्यवहार किया। ऐसी शिकायतों पर मौके पर क्या हुआ इसके सबूत नहीं होने कारण गलती किसकी थी, इसका पता नहीं लगता था। इस पर पुलिस मुख्यालय की ओर से करीब एक माह पूर्व ट्रेफिक पुलिसकर्मियों कैमरे दिए गए। मोबाइल से छोटी साइज के कैमरे पुलिसकर्मियों के कंधे के पास लगे बेज पर लगाए जाते हैं। कैमरे से ड्यूटी के दौरान की हर घटना रिकॉर्ड होती है। इसका सबसे बड़ा फायदा लोगों के ट्रेफिक पुलिसकर्मियों से उलझने पर पूरा घटनाक्रमा रिकॉर्ड हो जाता है। रिकॉर्डिंग के आधार उलझने वालो लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
पांच थानों व 21 ट्रेफिक पुलिस को
ट्रेफिक पुलिसकर्मी ड्यूटी पर कैमरे की रिकॉर्डिंग को ऑन करते है। इसके बाद करीब 12 घंटों तक लगातार रिकॉर्डिंग की जा सकती हैं। लंच के दौरान कैमरों की बैटरी चार्ज करनी पड़ती है। ड्यूटी पूरी होने के बाद रिकॉर्डिंग को ट्रेफिक पुलिस कंट्रोल रूम के कम्पयूटर में सेव किया जाता है। रिकॉर्डिंग एक सप्ताह तक कम्प्यूटर में सुरक्षित रखी जाती है।
Published on:
19 Jul 2019 03:01 am
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