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इस बार मुकाम पर खड़े नहीं होंगे आस्था के प्रतीक ताजिए

  - घोसी समाज नहीं करेगा छबील का वितरण
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इस बार मुकाम पर खड़े नहीं होंगे आस्था के प्रतीक ताजिए

फाइल फोटो

जोधपुर. हजरत इमाम हसन-हुसैन सहित करबला के शहीदोंं की याद में मातमी पर्व मोहर्रम 30 अगस्त को घरों में ही मनाया जाएगा। मोहर्रम एकता कमेटी के अध्यक्ष उस्ताद हाजी हमीम बक्स ने बताया की इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सरकार व प्रशासन की गाइडलाइन पालना में आस्था के प्रतीक ताजिए मुकाम पर खड़े नहीं किए जाएंगे। ढोल और अखाड़ों का प्रदर्शन नहीं होगा। मोहर्रम की पूर्व संध्या पर शनिवार को शाम शाम-ए-गरीबां (कत्ल की रात ) पर वैश्विक महामारी कोरोना के कारण अकीदतमंदों की ओर से सेहरा शीरीनी भी नहीं चढ़ाई जा सकेगी।

छबील वितरण कार्यक्रम स्थगित का निर्णय
मुस्लिम घोसी समाज जोधपुर की ओर से हर साल मोहर्रम पर हजारों लीटर दूध से निर्मित छबील का वितरण इस बार नहीं किया जाएगा। समाज के हाजी मोहम्मद अय्युब ने बताया की शुक्रवार को मुस्लिम घोसी समाज की ओर से कोरोनाकाल में सरकार की गाइडलाइन की पालना में यह निर्णय लिया गया। समाज की ओर से मोहर्रम के दिन समाज के लोगों से दूध एकत्र कर छबील वितरण का सिलसिला लंबे अर्से से चला आ रहा है। मोहर्रम के चांद की 10 तारीख यौमे-ए-आशुरा को जोधपुर घोसी समाज की ओर से दूध बेचा नहीं जाता है । उस दिन जितना भी दूध होता है उसकी छबील बनाकर हाथीराम ओड़ा चौराहा पर शौहदा-ए-कर्बला की याद में आमजन को वितरण किया जाता है