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भगवान महावीर जन्मोत्सव में उमड़े हजारों श्रद्धालू

जोधपुर.भगवान महावीर जन्म महोत्सव ( Lord Mahavir's birthday celebration ) गांधी मैदान ( Gandhi Maidan ) में हर्षोल्लास से मनाया गया। राष्ट्र संंत महोपाध्याय ललितप्रभ सागर ( Rashtra Sant Mahopadhyay Lalitprabha Sagar ) , महान दार्शनिक संत चन्द्रप्रभ सागर ( Nation saint Chandraprabh Sagar ) और मुनि शांतिप्रिय सागर ( Muni Shantipriya Sagar ) के सान्निध्य में भक्तों ने महावीर जन्मोत्सव का आनन्द उठाया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालू उमड़ पडे़।      
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जोधपुर

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MI Zahir

Aug 31, 2019

Thousands of devotees gathered in Lord Mahavir's birthday celebration

Thousands of devotees gathered in Lord Mahavir's birthday celebration

जोधपुर.भगवान महावीर जन्म महोत्सव ( Lord Mahavir's birthday celebration ) गांधी मैदान ( Gandhi Maidan ) में हर्षोल्लास से मनाया गया। राष्ट्र संंत महोपाध्याय ललितप्रभ सागर ( Rashtra Sant Mahopadhyay Lalitprabha Sagar ) , महान दार्शनिक संत चन्द्रप्रभ सागर ( Nation saint Chandraprabh Sagar ) और मुनि शांतिप्रिय सागर ( Muni Shantipriya Sagar ) के सान्निध्य में भक्तों ने महावीर जन्मोत्सव का आनन्द उठाया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालू उमड़ पडे़।

सभी सत्संगप्रेमियों ने महावीर भगवान के जयकारे लगाते हुए उन्हें मनोहारी झूला झुलाया। इस अवसर पर छप्पन दिक् कुमारियां बनकर आई सैकड़ों महिलाओं ने नृत्य किया। संत ललितप्रभ के महावीर प्रभु की भक्ति पर गाए गए बजे कंडलपुर में बधाई, नगरी में वीर जनमे, जागे भाग्य है त्रिशला मां के त्रिभुवन के नाथ जनमे... जय जयकार जयकार लिया प्रभु अवतार जय जयकार, हमें खुशी है तुम्हें खुशी है खुशियां अपरम्पार...जय बोलो महावीर स्वामी की, घट घट के अंतरयामी की... देखे देखे हैं स्वप्न महान मां त्रिशला देखे’ जैसे भजन सुन कर हजारों भाई-बहन दोनों हाथ उठाकर मस्ती में झूमे तो लगा मानो गांधी मैदान में पावापुरी धाम साकार हो उठा हो। संतों द्वारा महावीर जन्म का ऐसा विराट महोत्सव मनाना जोधपुरवासियों के लिए यादगार विरासत बन गया।

चौदह स्वप्नों के दर्शन करवाए
संबोधि धाम ट्रस्ट के तत्त्वावधान में आयोजित समारोह में माता त्रिशला द्वारा देखे गए चौदह स्वप्न-शेर, हाथी, वृषभ, लक्ष्मी, पुष्पमाला, चन्द्र, सूर्य, ध्वज, कुम्भ, पद्म सरोवर, क्षीरसागर, देवविमान, रत्न राशि और अग्निशिखा को लाभार्थियों द्वारा सभी सत्संगप्रेमियों को दर्शन करवाए गए और उनका विवेचन संतप्रवर द्वारा किया गया। जब संत चन्द्रप्रभ ने भगवान का जन्म वाचन किया तो श्रद्धालुओं ने नारियल फोड़ कर सभी को बधाइयां दीं और एक-दूसरे को नारियल की चिटकी खिला कर खुशियां बांटीं।

महावीर मानवता की सर्वोच्च पहचान
इस अवसर पर संबोधित करते हुए संत ललितप्रभ सागर ने कहा कि भारत की धरती का यह सौभाग्य है कि यहां पर महावीर जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया। महावीर ने व्यसन मुक्त, अहिंसक और स्वस्थ समाज की रचना की। वे भारतीयता, मानवता और नैतिकता की सर्वोच्च पहचान हैं। उनका जीवन और संदेश आज भी मानव समाज को प्रकाश की राह दिखा रहे हैं। जातिवाद, हिंसक युद्ध, यज्ञ में बलि, नारी अत्याचारों का विरोध कर महावीर ने उज्जवल भविष्य की नींव रखी। उनके अहिंसा, शांति, सहिष्णुता, संयम और भाईचारा जैसे सिद्धान्तों को अपनाकर हम परिवार-समाज और विश्व में स्वर्ग का निर्माण कर सकते हैं।