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हजारों पौधों को बनना था वटवृक्ष, लेकिन तिनके में हो गए तब्दील

  एक दशक बाद भी वन अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी ने नहीं ली सुध प्राकृतिक पुनरुत्पादन बढ़ाने के लिए रोपे हजारों पौधों की मौत का जिम्मेदार कौन  
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हजारों पौधों को बनना था वटवृक्ष, लेकिन तिनके में हो गए तब्दील

हजारों पौधों को बनना था वटवृक्ष, लेकिन तिनके में हो गए तब्दील

NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर. प्राकृतिक पुनर्ऊत्पादन बढ़ाने के लिए मंडोर क्षेत्र के बेरीगंगा क्षेत्र में रोपित हजारों पौधे रखरखाव के अभाव और अधिकारियों की अनदेखी के चलते तिनकों में तब्दील हो चुके हैं। प्रदेश के वर्तमान व तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में 12 अगस्त 2011 को सघन पौधरोपण कर राज्य स्तरीय कार्यक्रम की शुरुआत कर करीब साढ़े पांच हजार पौधे लगाए गए थे। कुछ माह तक तो पौधों की देखभाल की गई और चौकीदार भी रखा गया लेकिन करीब 25 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगे पेड़ों को नियमित पानी नहीं पिलाने से पूरे पौधे सूखते चले गए और अंजाम-ए-गुलिस्तां उजडकर तिनकों में तब्दील हो गया। एएनआर मॉडल के तहत क्षेत्र को हरा भरा करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हाथों से लगाया गया एकमात्र नीम का पौधा भी सूख चुका है।

एक दशक में नहीं ली किसी ने सुध
बेरीगंगा तीर्थ रोड पर रोपित हजारों पौधों लगाने के बाद किसी भी अधिकारी ने सुध तक नहीं ली। जहां पौधे रोपित किए गए वह जमीन वनविभाग के अधीन है। क्षेत्र में पिछले एक दशक से तैनात क्षेत्रीय वन अधिकारी, वनपाल, सहायक वनपाल, वन रक्षक नियमित रूप से ड्यूटी दे रहे थे। उसके बावजूद लाखों रुपए खर्च करने बाद हजारों पौधे सूखने की जिम्मेदारी कोई भी लेने को तैयार नहीं है।

पौधे सूखने पर करते है रिप्लेस

जहां भी वन क्षेत्र में पौधरोपण किया जाता है वहां पौधे सूखने पर वनविभाग का स्टाफ सूखे पौधे रिप्लेस करते हैं। बेरीगंगा क्षेत्र में पौधों के सूखने के बारे में अभी तक जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो जल्द ही पौधे रिप्लेस कर नए पौधे लगाए जाएंगे।
राजबिहारी मित्तल, सहायक वन संरक्षक जोधपुर।