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खरीद से पहले किसानों के टोकन की बंदरबांट, अपने घर से सैकड़ों किमी दूर जाकर बेचनी होगी सरसों!

एक सहकारी समिति से दूसरी सहकारी समिति में टोकन स्थानांतरित कर किसानों को घर से दूर भेजने की कवायद
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sehkari bhandar in jodhpur

खरीद से पहले किसानों के टोकन की बंदरबांट, अपने घर से सैकड़ों किमी दूर जाकर बेचनी होगी सरसों!

गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. प्रदेश में सोमवार से सरसों की खरीद 8 अप्रेल से शुरू हो रही है। लेकिन जिले की कई क्रय-विक्रय विपणन सहकारी समितियां एक-दूसरे को किसानों के टोकन स्थानांतरण करने का दबाव डाल रही है। टोकन स्थानांतरण होने से किसानों को अपने घर से 100-150 किलोमीटर दूर जाकर सरसों बेचना पड़ेगा। कुछ विपणन सहकारी समितियों ने इसकी भी शिकायत की है।

जिले में सरसो खरीद के लिए जोधपुर शहर, बिलाड़ा, भोपालगढ़, पीपाड़, फलोदी, बाप, बावड़ी, बालेसर, देचू और मथानिया सहित दस केंद्र बनाए गए हैं। सरकार ने किसानों का ऑनलाइन पंजीयन कर टोकन नम्बर दे दिए हैं। खरीद के समय किसान अपने टोकन नम्बर देकर अपनी उपज क्रय-विक्रय विपणन सहकारी समिति को बेच सकेंगे। किसानों से उनकी कुल उपज की 25 प्रतिशत खरीद होगी।

बालेसर-फलोदी ने भोपालगढ़ किसानों के टोकन मांगे
फलोदी व बालेसर सहकारी समितियां भोपालगढ़ सहकारी समिति प्रबंधन पर किसानों के टोकन स्थानांतरण का दबाव बना रही हैं। भोपालगढ़ ने इसकी शिकायत उप रजिस्ट्रार से की तो उसे कलक्टर के आदेश का गलत हवाला दिया गया। भोपालगढ़ ने कलक्टर के लिखित आदेश की कॉपी मांगी तो सहकारी अधिकारियों की पोल खुल गई। सरसों उत्पादक किसानों की संख्या अधिक होने से भोपालगढ़ ने फिलहाल टोकन स्थानांतरण से मना कर दिया है।

यह है गणित

किसानों की फसल बोरियों में भरकर तोलने और उसे प्लेटफॉर्म पर रखने के लिए प्रति बारदाना 10 से 12 रुपए हैण्डलिंग और ट्रांसपोर्टेशन का ठेका होता है। कई समितियों के प्रबंधक किसानों से खुद बारदाने में उपज भरवाकर उन्हीं से प्लेटफॉर्म पर तुलवाते हैं और ठेके का पैसा खुद की जेब में रख लेते हैं। अनजान किसानों से हैण्डलिंग व ट्रांसपोर्ट चार्ज भी वसूल कर लिया जाता है। साथ ही किसानों को फेयर एवरेज क्वालिटी (एफएक्यू) का डर दिखाकर मनमर्जी से उपज तुलाने का दबाव डालते हैं। अपनी उपज बेचने के लिए निकला किसान सहकारी समितियों के मनमाने रवैए के आगे बेबस रहता है।

एक लाख बोरी तोलने पर एक सहकारी समिति प्रबंधक की जेब में 10 से 15 लाख रुपए आते हैं। यही कारण है कि प्रत्येक सहकारी समिति प्रबंधक अपने यहां अधिक किसानों के टोकन हासिल करने की कोशिश करता है। हाल ही सहकारिता विभाग में हुए स्थानांतरण में रसूखदार अधिकारियों को मार्केटिंग समितियों के प्रबंधक का मलाईदार पद दिया है।

अभी किसी का टोकन स्थानांतरित नहीं किया
कलक्टर के मौखिक आदेश थे इसलिए कुछ सहकारी समितियों को टोकन स्थानांतरण के लिए कहा था। फिलहाल किसी का टोकन स्थानांतरित नहीं हुआ है।

राजेंद्रप्रसाद ओझा, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां जोधपुर

अधिक टोकन होने पर ही कर सकते हैं स्थानांतरित
किसी क्षेत्र में किसान कम होने पर ही उसके टोकन अन्यत्र स्थानांतरित किए जा सकते हैं। मनमर्जी से कोई समिति एक दूसरे से टोकन नहीं मांग सकती।

प्रकाश राजपुरोहित, जोधपुर कलक्टर