
मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत। फोटो- पत्रिका नेटवर्क
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) छात्रसंघ चुनाव में जीत पर जोधपुर प्रवास के दौरान शनिवार को अपने आवास पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का एबीवीपी से प्रत्यक्ष रूप से संबंध नहीं है, लेकिन वैचारिक रूप से हम सब एकसाथ हैं। यह राष्ट्रवादी विचारधारा, सोच और विकसित भारत के संकल्प व सपने की जीत है। इसके लिए मैं दिल्ली विश्वविद्यालय के सब छात्रों का अभिनंदन करता हूं।
उन्होंने कहा कि मैं विद्यार्थी परिषद और छात्रसंघ के जीते हुए उम्मीदवारों को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि ये चुनाव और इसका परिणाम जिस बड़े मतांतर के साथ आया है, यह इस बात का परिचायक है कि जेन-जी आज भी राष्ट्रवादी सोच और विचारधारा के साथ में खड़ा है। राष्ट्र के विकास की संकल्पना के साथ खड़ा है। राष्ट्रीय हित में कार्य करने वाले लोगों के साथ कदमताल करने के लिए तैयार है, ना की भ्रांति फैला करके संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करके, उनके सामने चुनौती एवं प्रश्नचिह्न खड़े करके देश को असमंजस में डालने वाले लोगों के साथ है। यह परिणाम इस बात का परिचायक है कि देश की जनता, देश की युवा पीढ़ी और देश का आने वाला भविष्य किस दिशा में सोचता है।
वहीं कांग्रेस के जोधपुर जिला अध्यक्ष की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा पर अभद्र टिप्पणी से संबंधित सवाल पर शेखावत ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान में इस तरह की भाषा को मान्यता नहीं दी। उन्होंने लोकतंत्र में शुचिता और पवित्रता बनी रहे, ये बात कही। महात्मा गांधी, जिनके आदर्शों पर भारत के लोकतंत्र की नींव रखी गई, उन्होंने जीवन में संयम और वाणी में संयम की बात कही।
शेखावत ने कहा कि बाबा साहब और महात्मा गांधी के नाम की सौगंध लेकर राजनीति करने वाले लोग इस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं। उनको यह संस्कार वर्तमान में जो उनके नेता हैं, ये उनसे मिले हैं।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं कांग्रेस नेता सुपारस भंडारी का धन्यवाद करना चाहता हूं कि उन्होंने साहस के साथ में जो गलत है, उसको स्वीकार करते हुए क्षमा वीरस्य से भूषण का उदाहरण देते हुए अपने जिलाध्यक्ष से कहा कि इस तरह की भाषा के लिए उनको क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को मैं बस इतना कहूंगा, हम इसका प्रतिकार कर सकते हैं, लेकिन इस तरह के विषयों का प्रतिकार करने के संस्कार हमारे नेतृत्व ने नहीं दिए हैं। ऐसी भाषा पर कांग्रेस को आत्ममंथन जरूर करना चाहिए। अगर नहीं करेंगे तो जनता चुनाव में इसका जवाब दे ही देगी।
Updated on:
20 Sept 2025 04:38 pm
Published on:
20 Sept 2025 04:38 pm
