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प्रशिक्षित नर्सेज करेंगे हार्ट फैलियर मरीजों की मॉनिटरिंग

-एम्स दिल्ली के बाद अन्य संस्थानों में भी लागू करने की तैयारी
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प्रशिक्षित नर्सेज करेंगे हार्ट फैलियर मरीजों की मॉनिटरिंग

प्रशिक्षित नर्सेज करेंगे हार्ट फैलियर मरीजों की मॉनिटरिंग

जोधपुर. देश में इन दिनों हार्ट फैलियर के 5 से 10 मिलियन मरीज हैं। मरीजों की संख्या कम करने व चिकित्सा सुविधाओं में बेहतरी की दिशा में नर्सिंग स्टॉफ को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, जो हार्ट फैलियर के मरीजों की मॉनिटरिंग करेंगी। प्राय: देखा गया है कि हार्ट फैलियर के मरीजों को डॉक्टर दवाई तो लिख देते हैं, लेकिन मॉनिटरिंग के अभाव में मरीज दवाइयों का सेवन नहीं करते हैं। ऐसे में नया कांसेप्ट शुरू कर रहे हैं, जिसे एम्स दिल्ली के बाद अन्य संस्थानों में भी लागू करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। एम्स में शनिवार को आयोजित कॉन्फ्रेंस में एम्स नई दिल्ली केहृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप सेठ ने यह बात कही।

कम होगा अस्पताल आना
डॉ. सेठ ने कहा कि दवाइयों का सेवन नियमित नहीं करने से हार्ट फैलियर के मरीजों को बार-बार अस्पताल आकर एडिमट होना पड़ता था। जबकि सरकारी अस्पतालों में एक डॉक्टर को ही सैंकड़ों मरीज देखने पड़ते हैं। इस कांसेप्ट के तहत प्रशिक्षित नर्सेज हार्ट फैलियर के मरीज देखेंगी। इससे न सिर्फ मरीज का बार-बार अस्पताल आना बंद होगा, बल्कि इलाज में लगने वाले खर्च में भी कमी आएगी। मरीज के पास नर्स के नम्बर भी रहेंगे जो किसी भी असुविधा के समय सहायता ले सकेगा।

युवाओं में नशा हार्ट फैलियर का कारण

श्रीचित्रा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज त्रिवेंद्रम से आए डॉ. हरीकृष्णन ने कहा कि इन दिनों युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है। 30 वर्ष की उम्र तक के युवाओं में नशा हार्ट फैलियर का बड़ा कारण बनता जा रहा है। इसका मुख्य कारण स्मोकिंग हैं। इसलिए इसे बचाव के लिए नियमित व्यायाम, योगा के साथ लाइफ स्टाइल में बदलाव एवं स्वस्थ खानपान पर जोर देना आवश्यक है। युवा पीढ़ी को हार्ट फैलियर के खतरों से बचाने के लिए स्कूली स्तर से ही लाइफ स्टाइल एवं हैल्थ को लेकर जागरुक करना होगा।

चिकित्सा सुविधाओं पर हुआ मंथन

आयोजन सचिव डॉ. सुरेंद्र देवड़ा ने बताया कि कार्यशाला में प्रथम दिन आठ सत्र हुए। विशेषज्ञों ने पीएचसी, सीएचसी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले हार्ट संबंधित मरीजों की जांच, इलाज आदि पर अनुभव साझा किए। साथ ही ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, हार्ट फैलियर के मरीजों को किस प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं दी जाए एवं इलाज की नवीन तकनीक एवं संसाधनों पर भी मंथन किया गया।

समापन सत्र में इको क्विज का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर डॉ. राहुल चौधरी, डॉ. अतुल कौशिक, डॉ. दीपक, डॉ. सत्येंद्र सहित विभिन्न विभागों के फैकल्टी उपस्थित थे। रविवार को इको वर्कशॉप का आयोजन होगा।