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ट्रक ड्राइवर के बच्चों की मेहनत लाई रंग, नीट व जेईई में बजाया डंका बनेंगे डॉक्टर व इंजीनियर

- सुंडाणियों की ढाणी में रहने वाले दो भाइयों का नीट व जेईई-एडवांस परीक्षा में चयन

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ट्रक ड्राइवर के बच्चों की मेहनत लाई रंग, नीट व जेईई में बजाया डंका बनेंगे डॉक्टर व इंजीनियर

- ग्रामीणों ने हॉर्डिंग देखकर मां को कहा, उसके बच्चों की भी एक दिन फोटो लगेगी

जोधपुर/बाप. जिले की बाप तहसील की कानासर ग्राम पंचायत में सुंडाणियों की ढाणी में रहने वाले ट्रक ड्राइवर मंगलाराम विश्नोई ने दिन-रात ट्रक चलाकर अपने तीनों बेटों को काबिल बना दिया। इतना काबिल कि अब तीनों बच्चों से मंगलाराम खुद जाना जाएगा। एक बेटा डॉक्टर बनेगा, दूसरा इंजीनियर और तीसरा शिक्षक। मंगलाराम के बेटे महेंद्र ने मेडिकल कॉलेज की प्रवेश परीक्षा नीट-2018 में 8593वीं रैंक हासिल की, वह डॉक्टर बनेगा। दूसरे बेटे श्यामसुंदर ने 15949वीं रैंक प्राप्त की। वह आईआईटी में पढ़ाई करेगा। दोनों भाइयों ने सालभर कोटा में रहकर पढ़ाई की। तीसरा बेटा सुरेंद्र कुमार जोधपुर में बीएड कर रहा है। अंत में थम गए ट्रक के पहिए मंगलाराम के तीनों बच्चे शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल थे। पांचवी तक की पढ़ाई ढाणी में की। नवीं तक बाप तहसील में पढ़े। इसके बाद जोधपुर आकर 12वीं उत्तीर्ण की। मंगलाराम ने दिन-रात मेहनत करके पैसा इकठ्ठा करने के साथ तीनों बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करता रहा। महेंद्र व सुरेंद्र को कोटा में कोचिंग करवाई। इसके लिए साहूकारों से पैसे उधार लेने के साथ लोन भी लेना पड़ा। तीनों बच्चों ने एक अरसे से बाहर रहकर पढ़ाई की और बहुत कम अपने माता-पिता से मिले। महेंद्र व श्यामसुंदर ने बताया कि वे कोचिंग के अतिरिक्त 4-5 घण्टे की पढ़ाई किया करते थे। खेलों, विशेषकर क्रिकेट खेलना अच्छा लगता है। दो महीने पहले मंगलाराम का एक्सीडेंट हो जाने से ट्रक के पहिए थम गए हैं। अब साहूकारों से ऋण लेकर ही घर खर्च चलाना पड़ रहा है।

मां ने कहा, चैन से रोटी तक नहीं खाई

तीनों बच्चों की मां चंद्रादेवी ने कहा कि वह और उसके पति कई सालों से बच्चों को पैरों पर खड़ा करने के लिए दिन-रात भाग दौड़ कर रहे हैं। कभी चैन से दो जून की रोटी नहीं खाई। एक बार बच्चों की देखरेख के लिए चंद्रा जब बाप तहसील गई तो वहां कोचिंग संस्थानों के होर्डिंग पर कई सफल बच्चों के फोटो देखे। लोगों ने कहा कि एक दिन उसके बच्चों के फोटो भी यहां लगेंगे और आज वह दिन आ गया।


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