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कक्षा से उठकर सर्पदंश से घायल बच्चे को रक्त देने एम्स पहुंचे जेएनवीयू के दो छात्र

- इमरजेंसी में भर्ती 8 वर्षीय बालक को चाहिए था रक्त
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कक्षा से उठकर सर्पदंश से घायल बच्चे को रक्त देने एम्स पहुंचे जेएनवीयू के दो छात्र

कक्षा से उठकर सर्पदंश से घायल बच्चे को रक्त देने एम्स पहुंचे जेएनवीयू के दो छात्र

जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में एमएससी के दो छात्रों ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के आपातकालीन इकाई में भर्ती एक अनजान बच्चे को अपना रक्त देकर उसकी जान बचाई। बच्चे को सांप ने काट लिया था, जिसके कारण उसे खून की तत्काल जरुरत थी। जिस वक्त दोनों छात्रों को एम्स में रक्त की जरुरत का संदेश मिला, उस समय दोनों कक्षा में पढ़ रहे थे। वहां से शिक्षक की अनुमति लेकर रक्तदान करने गए। बच्चा अब खतरे से बाहर है।

विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय स्वयंसेवक इकाई (एनएसएस) के स्वयंसेवकों ने कोविड-19 के दरमियान एक वाट्सएप ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में किसी जरूरतमंद को रक्त की आवश्यकता पडऩे का संदेश मिलने पर छात्र-छात्राएं अस्पताल जाकर रक्तदान करके आते हैं। गुरुवार दोपहर 1.10 बजे विवि के किसी छात्र ने मैसेज करके बताया कि उसके गांव के एक 8 वर्षीय बालक धीराराम को सांप ने काट लिया और गंभीर हालत में एम्स लेकर आए हैं। एम्स में डॉक्टरों ने हाथों-हाथ दो यूनिट खून चढ़ाने की बात कही है। सूचना मिलने पर एमएससी भौतिकी के छात्र तरुण सिसोदिया और सुरेंद्र चौधरी ने रक्तदान करने का निर्णय किया। वे जेएनवीयू नया परिसर से सीधा इमरजेंसी पहुंचे और धीराराम के माता-पिता से मिले। कुछ ही देर में दोनों ने एक साथ रक्तदान किया। दोपहर 2.30 बजे दोनों रक्तदान करके वापस विवि पहुंच गए। कुलपति प्रो पीसी त्रिवेदी और एनएसएस समन्वयक डॉ केआर पटेल ने छात्रों की पीठ थपथपाई।
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‘हमने कोविड में जरुरतमंदों की मदद के लिए ब्लड डोनर्स ग्रुप बनाया था। आज भी जरुरत पडऩे पर डेढ़ घण्टे में ही हमारे दो छात्रों ने रक्तदान करके बच्चे के जीवन को संकट से बाहर निकाला।’
प्रो प्रवीण गहलोत, कार्यक्रम अधिकारी (एनएसएस), जेएनवीयू