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यूपी पुलिस को फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक माह की मोहलत

वर्ष 2005 में बोरूंदा में हत्या व डकैती के मामले में एक आरोपी किरणपाल वर्ष 2007 में हिरासत से ही फरार हो गया था, जबकि दूसरा आरोपी लोकेन्द्र भी उसी साल अस्थायी जमानत पर छूटने के बाद से फरार है। इससे पूर्व भी कोर्ट ने कई प्रयास किए कि दोनों आरोपी दुबारा गिरफ्तार हो जाए, लेकिन इसके अभाव में न तो सीआरपीसी की धारा 456 की कार्यवाही पूर्ण हो पाई और न ही गिरफ्तारी।
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यूपी पुलिस को फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक माह की मोहलत

यूपी पुलिस को फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक माह की मोहलत

जोधपुर.

गत वर्ष गिरफ्तारी के लिए स्टैंडिंग वारंट जारी होने के बाद भी वर्ष 2007 से फरार दो आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) के आदेश पर उत्तरप्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (Additional Director General of Police, Uttar Pradesh) बुधवार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुए।


न्यायाधीश संदीप मेहता और न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी की खंडपीठ में आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली के साथ उत्तरप्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार पेश हुए। उन्होंने बताया कि यूपी पुलिस की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उप अधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में तीन विशेष दल गठित किए गए हैं।

एक अन्य विशेष दल तीन दलों में समन्वय कर रहा है। इसका नेतृत्व एसएसपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। कोर्ट ने यूपी पुलिस को एक महीने की मोहलत देते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि यूपी के पुलिस महानिदेशक गणेश महोत्सव व मोहर्रम सहित अन्य धार्मिक आयोजनों में कानून व्यवस्था को लेकर उपस्थित नहीं हो पाए, जिनकी जगह एडीजी पेश हुए।

दरअसल, वर्ष 2005 में बोरूंदा में हत्या व डकैती के मामले में एक आरोपी किरणपाल वर्ष 2007 में हिरासत से ही फरार हो गया था, जबकि दूसरा आरोपी लोकेन्द्र भी उसी साल अस्थायी जमानत पर छूटने के बाद से फरार है।

इससे पूर्व भी कोर्ट ने कई प्रयास किए कि दोनों आरोपी दुबारा गिरफ्तार हो जाए, लेकिन इसके अभाव में न तो सीआरपीसी की धारा 456 की कार्यवाही पूर्ण हो पाई और न ही गिरफ्तारी।

पिछले साल 29 नवंबर को हाईकोर्ट उत्तरप्रदेश के डीजीपी को नोटिस जारी करते हुए दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के स्टैंडिंग वारंट पर अमल करने को कहा था। इसके बावजूद डीजीपी की ओर से कोई प्रत्युत्तर प्राप्त नहीं हुआ। इस साल जनवरी व मार्च में दो बाद मामला सूचीबद्ध हुआ, लेकिन डीजीपी यूपी ने कोई पालना रिपोर्ट पेश नहीं की।

इस बीच, हाईकोर्ट में मामले की पत्रावली इधर-उधर हो गई और यह मामला चार महीने बाद सूचीबद्ध हुआ। इसे गंभीरता से लेते हुए खंडपीठ ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को इस प्रकरण की डे-टू-डे मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए थे। साथ ही डीजीपी यूपी को व्यक्गित रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्टीकरण देने को कहा गया था कि अब तक दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो पाई।