
जोधपुर. अल्लाहू अल्लाहू …,किरपा करो महाराज …,दमादम मस्त कलंदर…। यहां माहौल में दिलकश सूफियाना कलाम और रूहानियत की खुशबू घुल रही थी और अकीदत के फूल महक रहे थे तो जायरीन खुशी से चहक रहे थे। यह मेहरानगढ़़ दुर्ग में हजरत शहीद भूरे खां की मजार पर आयोजित उर्स का नजारा था। हजरत शहीद भूरे खां के उर्स के दूसरे दिन रविवार शाम कुरआनख़्वानी और फातेहाख्वानी की गई। शाम को लंगर का आयोजन किया गया।
मजार पर नातिया कलाम व सूफियाना कलाम
इसके बाद मारवाड़ के पूर्व राजघराने की ओर से शहीद भूरे खां की मजार पर चादर शरीफ पेश की गई। रविवार शाम कुरआनख़्वानी और फातेहाख्वानी की गई। इसके बाद मौलाना आदम, मोहम्मद कासिम व अन्य उलेमा ने तकरीर पेश की। साथ ही नातख्वां रिजवान अली, मोइनुद्दीन व हसनैन साहब शहीद हजरत भूरे खां की शान में नातिया कलाम पेश किया। इसी कड़ी में कव्वाल इरफान तुफैल दिलकश आवाज में सूफियाना कलाम पेश कर रंग जमाया। मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित दरगाह शहीद भूरे खां का उर्स मुबारक शनिवार सुबह झंडे की रस्म के साथ शुरू हुआ था। दरगाह के मुतव्वली मन्सूर मोहम्मद ने बताया कि सोमवार शाम कुल की रस्म के वक्त भी कव्वाल मधुर आवाज में सूफियाना कलाम पेश करेंगे।