सादगी से मनाई जाएगी वीर दुर्गादास जयंती

महाराजा अजीत सिंह को जोधपुर के महाराजा बनाने में महत्वपूर्ण योगदान

By: Nandkishor Sharma

Published: 31 Jul 2020, 11:20 PM IST

जोधपुर. मारवाड़ की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वामी भक्त वीर दुर्गादास राठौड़ की 382वीं जयंती 2 अगस्त को सादगी से मनाई जाएगी। केन्द्र एवं राज्य सरकार की गाइड लाइन अनुसार किसी भी प्रकार के उत्सव एवं समारोह के लिए निर्धारित नियमों को दृष्टिगत रखते हुए समिति अध्यक्ष जगतसिंह राठौड़, सचिव भागीरथ वैष्णव एवं समिति के वरिष्ठ सदस्यों ने जयंती को सादगी से मनाए जाने का निर्णय लिया है। सुबह 8 बजे मसूरिया पहाड़ी पर स्थित वीर दुर्गादास की अश्वारोही प्रतिमा का पूजन कर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। वीर शिरोमणि दुर्गादास राठौड़ का नाम मारवाड़ ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण हिन्दुस्तान के इतिहास में त्याग, बलिदान, देश-भक्ति व स्वामिभक्ति के लिये स्वर्ण अक्षरों में अमर है।


औरंगजेब का लालच नहीं डिगा सका
अजीत सिंह के बड़े होकर गद्दी पर बैठाने तक की लम्बी अवधि में उन्होंने जोधपुर की गद्दी को बचाने के लिये औरंगजेब के द्वारा संचालित तमाम षड्यंत्रों के खिलाफ लोहा लेते हुये कई लड़ाईयाँ लड़ी। इस बीच करीब 25 वर्षों के संघर्ष के दौरान औरंगजेब का बल या अपार धन का लालच वीर दुर्गादास राठौड को नहीं डिगा सका और अपनी वीरता के बल पर जोधपुर की गद्दी को सुरक्षित रखने में वीर दुर्गादास सफल रहे। पच्चीस वर्ष की अवस्था में सन् 1708 में अजीत सिंह को जोधपुर की गद्दी पर बिठाकर ही उन्होंने न केवल चैन की सांस ली बल्कि राजा जसवन्त सिंह को दिया गया वचन पूर्ण किया।

उज्जैन में गुजारे अंतिम दिन
जीवन के अन्तिम दिनों में वे स्वेच्छा से मारवाड़ छोड़कर उज्जैन चले गये। वहीं क्षिप्रा नदी के किनारे उन्होंने अपने जीवन के अन्तिम दिन गुजारे। दिनांक 22 नवम्बर सन् 1718 (माघशीर्ष शुक्ल एकादशी सम्वत् 1775) में उनका निधन हो गया। उनका अन्तिम संस्कार उनकी इच्छा के अनुसार क्षिप्रा नदी के तट पर ही किया गया।

Nandkishor Sharma Desk
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