ठाकुरजी के मंदिरों के प्राचीन झूले दुर्दशा के शिकार

प्रबंधित मंदिरों में नहीं मनाया जाएगा जन्माष्टमी महोत्सव

By: Nandkishor Sharma

Published: 09 Aug 2020, 10:24 PM IST

जोधपुर. देवस्थान विभाग के अधीन मंदिरों में आस्था से जुड़े ठाकुरजी के झूलो की हालत खस्ता होती जा रही है। जोधपुर के ऐतिहासिक कृष्ण मंदिरों में हर साल श्रावण और जन्माष्टमी को झूला महोत्सव मनाने की परम्परा रही है। वर्तमान में इसी परम्परा से जुड़े ठाकुरजी के कलात्मक झूले भी रखरखाव के अभाव में दुर्दशा का शिकार होते जा रहे है। लकड़ी की आकर्षक खुदाई और स्वर्ण नक्काशी से सुसज्जित झूले के अलग अलग हिस्सों को एक ही बॉक्स में रखने की व्यवस्था भी अब चौपट हो चुकी है। उदयमंदिर स्थित रसिक बिहारी मंदिर (नैनी बाई ) के मंदिर में ठाकुरजी का कलात्मक झूला लंबे अर्से से धूल फांक रहा है। प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के अन्य मंदिरों में भी झूले दुर्दशा के शिकार है। मंदिरों में नहीं होंगे उत्सव भगवान कृष्ण के प्राकट्योत्सव जन्माष्टमी को मंदिरों में 12 अगस्त की मध्यरात्रि को कोई उत्सव नहीं मनाया जाएगा। सोशल डिस्टेंसिंग और रात्रिकालीन कफ्र्यू के कारण दही मटकी फोड़ प्रतियोगिता के आयोजन भी नहीं हो सकेंगे। विश्व हिन्दू परिषद की ओर से हर साल जन्माष्टमी की शाम होने वाली शोभायात्रा भी इस बार नहीं होगी।

झूलों की मरम्मत होगी, नहीं होगा ठाकुरजी का उत्सव

देवस्थान प्रबंधित ठाकुरजी के मंदिरों में प्राचीन झूलों की स्थिति और मरम्मत के लिए विभाग के प्रबंधक से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार सभी जर्जर झूलों की मरम्मत करवाई जाएगी। राज्य सरकार के निर्देशानुसार देवस्थान प्रबंधित ठाकुर जी के मंदिरों में इस बार जन्माष्टमी का कोई भी उत्सव नहीं मनाया जाएगा।

जतिन गांधी, सहायक आयुक्त देवस्थान विभाग जोधपुर संभाग

Nandkishor Sharma Desk
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