
Bhanwari Devi case
बहुचर्चित एएनएम भंवरीदेवी अपहरण व हत्या मामले में बुधवार को अभियोजन के गवाह सीबीआई के इंस्पेक्टर आरके सिंह के बयान दर्ज किए गए। सीबीआई के विशिष्ट अधिवक्ता ऐजाज खान ने पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा के समक्ष इंस्पेक्टर के बयान लिए। गवाह ने मामले में बरामदगी और अभियुक्तों की गिरफ्तारी सहित विभिन्न साक्ष्यों की बनाई गई फर्द के सम्बन्ध में बयान दिए। बचाव पक्ष ने जिरह के दौरान एक इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारी के मामले का अनुसंधान कराने पर सवाल उठाए। सीबीआई इंस्पेक्टर ने कहा कि उन्होंने केवल फर्दे बनाने का काम किया था। समय अभाव के कारण बचाव पक्ष के बाकी अभियुक्तों के अधिवक्ता की जिरह अधृरी रही। गुरुवार को इसी गवाह से फिर जिरह होगी। सुनवाई के दौरान महिपाल मदेरणा व मलखानसिंह के अलावा अन्य आरोपियों को पुलिस ने न्यायालय में पेश किया। गवाह के बयान और जिरह के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता जगमालसिंह चौधरी,संजय विश्नोई व राजेंद्र चौधरी आदि उपस्थित थे।
वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के खिलाफ दिया प्रार्थना पत्र
सीबीआई की ओर से मंगलवार को यूएसए की जाुच एजेंसी एफबीआई की अधिकारी अम्बर बी कार के बयान दर्ज करवाने के लिए वीडियो कांफ्रेसिंग की अर्जी दाखिल की गई थी। बचाव पक्ष ने बुधवार को इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए न्यायालय में प्रार्थना पत्र पेश किया। गुरुवार को इस पर बहस होगी। गुरुवार को ही इस एक मात्र विदेशी गवाह के बयान दर्ज करना निर्धारित है। इसके लिए पूर्व में सम्मन जारी किया जा चुका है।
मास्टर प्लान पर सुनवाई, निगम आयुक्त के खिलाफ अवमानना नोटिस
राजस्थान हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान व ग्रीनबैल्ट के मामलों में जारी आदेशों की पालना नहीं करने पर दायर एक अवमानना याचिका पर जोधपुर नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश कसेरा के नाम से अवमानना नोटिस जारी कर दस दिन में जवाब तलब किया है। न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास व न्यायाधीश विनीत माथुर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता भरत सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
अतिक्रमण करते हुए निर्माण कार्य कर लिए
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुनील मेहता ने कहा कि मैरिज पैलेस गढ़ गोविंद के संचालकों महीपालसिंह व जयपालसिंह ने प्लांटेशन व दो तरफ की सड़कों पर अतिक्रमण करते हुए निर्माण कार्य कर लिए हैं, जो कोर्ट के आदेशों के विपरीत हैं। इसकी निगम आयुक्त सहित उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि मुख्य सचिव से की गई शिकायत के बाद जिला कलक्टर की ओर से जांच कराने पर भी निगम की ओर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई।
सनसनीखेज अपहरण के नाम पर दायर एफआईआर निरस्त
जोधपुर. राजस्थान हाइकोर्ट ने कीर्तिनगर माता का थान निवासी खेमसिंह गहलोत व परिहारनगर भदवासिया निवासी रूपसिंह के खिलाफ चौपासनी हाउसिंग बोर्ड पुलिस थाना में आईपीसी की धारा 365 के तहत दायर एफआईआर निरस्त कर दी है। न्यायाधीश संदीप मेहता ने याचिकाकर्ताओं की ओर से सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर विविध आपराधिक याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
यह था मामला
चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सेक्टर 21 ई निवासी एक युवती ने 13 अगस्त 2017 को पुलिस थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि सुबह 7 बजे एक लड़की और दो आदमी आए और डरा धमका कार में साथ ले गए, जिसकी नंबर प्लेट ढंकी हुई थी। वे अपने आपको मंडोर पुलिस बता रहे थे। उन्होंने वहां युवती से राखी बंधवाई और इसका वीडियो बनाया। साथ ही उसे रिश्वत देने का भी प्रयास किया गया। युवती ने एक चश्मदीद गवाह का हवाला देते हुए कहा कि वे लोग भदवासिया निवासी एक युवती के रिश्तेदार हो सकते हैं। इस आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और बाद में हुए अनुसंधान में याचिकाकर्ताओं पर संदेह करते हुए उनके नाम जोड़े गए।
राखी बंधाया जाना ज्ञात हुआ
इस पर पीडि़त पक्ष (याचिकाकर्ता) ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका की सुनवाई में उच्चाधिकारी से वापस अनुसंधान कराने के बाद पुलिस थाना चौपासनी हाउसिंग बोर्ड की ओर से कोर्ट में पेश तथ्यात्मक प्रतिवेदन के अनुसार शिकायतकर्ता युवती के याचिकाकर्ता के यहां स्वेच्छा से स्कूटी पर जाना उजागर हुआ और रक्षा बंधन के अवसर पर राखी बंधाया जाना ज्ञात हुआ।
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बॉयो मेडिकल वेस्ट बैग्स सप्लाई मामले में याचिका खारिज
जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर के अस्पतालों में बॉयोमेडिकल वेस्ट बैग्स सप्लाई का ठेका एक प्लास्टिक बैग्स निर्माता को देने की शिकायत के साथ दायर याचिका खारिज कर दी है। न्यायाधीश विजय विश्नोई ने याचिका का निस्तारण करने के साथ ही मामला सम्बंधित चिकित्सा विभाग के उच्चाधिकारियों के समक्ष रखने व अधिकारियों के यथाशीघ्र मामले का निस्तारण करने का आदेश भी जारी किया गया है।
सक्षम फर्म नहीं है
याचिकाकर्ता सुशील शर्मा की ओर से अधिवक्ता अर्पित भूत ने कहा कि शहर के अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में बॉयो मेडिकल वेस्ट बैग्स सप्लाई करने का ठेका जिस फर्म को दिया गया है, वह सक्षम फर्म नहीं है और सिर्फ प्लास्टिक बैग्स की मैन्युफैक्चरिंग करती है। यह भी कहा गया कि फर्म ने इस सम्बंध में टेंडर भरते समय आवश्यक दस्तावेज भी पेश नहीं किए हैं, लेकिन अधिकारी ने इसकी अनदेखी करते हुए अवैधानिक तरीके से इस फर्म को ठेका जारी कर दिया।
मामला उठा सकता है
याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद कोर्ट का यह मानना है कि वह ठेकेदार की योग्यता का आकलन करने के लिए पूर्ण रूप से सज्जित नहीं है जिसे बॉयोमेडिकल वेस्ट बैग्स का ठेका दिया गया है। वैसे याचिकाकर्ता चाहे तो राज्य सरकार, सचिव चिकित्सा विभाग अथवा किसी भी अन्य सक्षम अधिकारी से सम्पर्क कर यह मामला उठा सकता है। यह आशा की जाती है कि यदि इस मामले में इनमें से किसी भी अधिकारी के समक्ष ज्ञापन दिया जाता है तो उसे स्वीकार करते हुए उसका शीघ्र ही ऑब्जेक्टिव तरीके से निस्तारण किया जाएगा।
Published on:
25 Jan 2018 08:08 am
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