
killing of state bird Godavan
राजस्थान के राज्यपक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जैसलमेर जिले में पोकरण तहसील के खेतालाई से करीब दो किमी दूर गांव की सरहद से गुजरने वाली हाइटेंशन लाइन से टकराकर गुरुवार रात गोडावण की मौत हो गई। क्षेत्र के ग्रामीण राधेश्याम पेमानी ने बताया कि अधिकारियों के पहुंचने तक मृत गोडावण को जानवरों ने नोंच डाला। क्षेत्र में राज्यपक्षी गोडावण मरने की इस वर्ष यह तीसरी घटना है। सूचना मिलने पर शुक्रवार को जैसलमेर के उपवन संरक्षक अनूप के आर सहित क्षेत्रीय वन अधिकारी और वनकर्मी घटना स्थल पर पहुंचे। देश के गोडावण विशेषज्ञों के अनुसार पूरी दुनिया में गोडावण अब सिर्फ रामदेवरा, पोकरण, जैसलमेर के कुछ क्षेत्र में बचा है। पूरे विश्व में इसकी संख्या 60 से भी कम हैं। शर्मीले पक्षी की ब्रीडिंग नहीं होने के कारण आगामी पांच साल में घोर संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल राजस्थान का स्टेट बर्ड गोडावण लुप्त हो जाएगा।
राजस्थान में गोडावण की स्थिति
2010 ----45
2011----52
2012----60
2013----44
2014----40
2015----44
पत्रिका ने बार बार सरकार को चेताया
राजस्थान पत्रिका ने पिछले माह 3 नवम्बर को आगामी पांच साल में खत्म हो जाएगा राजस्थान का 'सरताज' शीर्षक से प्रकाशित समाचार में गोडावण की सुरक्षा को लेकर सरकार को चेताया था। समाचार में वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन एवं गोडावण पर लंबे अर्से तक देश भर में शोध व सर्वे करने वाले विशेषज्ञ डॉ. एमके रंजीतसिंह ने भी महत्चपूर्ण सुझाव दिए, लेकिन उन पर कोई अमल नहीं किया गया।
खतरों की मैपिंग जरूरी
जब तक गोडावण के विचरण स्थलों पर मंडराने वाले खतरों की मैपिंग नहीं होगी, तब तक उन खतरों के अनुरूप संरक्षण नहीं होगा। विंड, इलेक्ट्रिक, ऑयल कंपनियों, वनविभाग सहित सभी वन्यजीव प्रेमियों और संस्थानों को राज्य पक्षी बचाने के सामूहिक प्रयास जरूरी है। अरबों रूपए खर्च होने के बाद भी यदि हमारा राज्यपक्षी नहीं बचता है तो दुर्भाग्यपूर्ण है। बर्ड रिफ्लेक्टर की बात लंबे अर्से की जा रही है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। -डॉ. हेमसिंह गहलोत, पक्षी विशेषज्ञ, जोधपुर
गोडावण मौत की होगी जांच
पोकरण के पास खेतालाई गांव में गुरुवार रात करीब 8 बजे धमाके की आवाज क्षेत्र के एक किसान को सुनाई दी। उसने आसपास जाकर भी देखा, लेकिन अंधेरा होने के कारण उसे कुछ नजर नहीं आया। सुबह जब उसने पुन: क्षेत्र का मुआयना किया तो हाइटेंशन लाइन के नीचे गोडावण का शव क्षत-विक्षत हालात में पड़ा मिला। गोडावण के शव को क्षेत्र के जानवरों ने रात में ही आहार बना डाला। विसरा एकत्र कर उसे भारतीय वन्यजीव अनुसंधान केन्द्र देहरादून भेजे जाएंगे। -आरएस शेखावत, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव ) जोधपुर संभाग
Published on:
30 Dec 2017 05:09 pm
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