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30 तारीख के बाद गेहूं नहीं उठेगा, गरीबों का गेहूं लेप्स होने का खतरा

- राज्य सरकार ने महीने की अंतिम तारीख को चालान काटने की प्रक्रिया की बंद- खाद्य विभाग ने प्रदेश के समस्त जिलों को दी चेतावनी
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30 तारीख के बाद गेहूं नहीं उठेगा, गरीबों का गेहूं लेप्स होने का खतरा

30 तारीख के बाद गेहूं नहीं उठेगा, गरीबों का गेहूं लेप्स होने का खतरा

जोधपुर. रसद विभाग और राजस्थान राज्य खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम को राशन की दुकानों पर मिलने वाले गेहूं का उठाव महीने की अंतिम तारीख तक करना होगा। इसके बाद चालान काटने की प्रक्रिया ऑनलाइन बंद हो जाएगी। यह नियम अप्रेल महीने के लिए आवंटित गेहूं से लागू किया जा रहा है। गेहूं के उठाव की अवधि नहीं बढऩे से गरीबों का गेहूं लेप्स होने का खतरा बढ़ेगा। इससे कुछ राशन की दुकान के उपभोक्ता गेहंू से वंचित रह सकते हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के अंतर्गत राशन की दुकानों पर मिलने वाला गेहूं केंद्र सरकार एक महीने पहले जारी करती है। मसलन राज्य सरकार की एजेंसियों को अप्रेल महीने का गेहूं भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के डिपो से उठाने के लिए एक से तीस मार्च तक का समय दिया गया है लेकिन हर बार ट्रकों की उपलब्धता कम होने और एफसीआई में गेहंू का एडवांस जमा नहीं होने से अंतिम तारीख तक गेहूं का उठाव नहीं हो पाता है। नतीजन हर बार उठाव की अवधि 15 दिन के लिए बढ़ानी पड़ती है।

छुट्टी के दिन अतिरिक्त मजदूरी देनी पड़ रही
पूरे प्रदेश में गेहूं उठाव में देरी की शिकायतें प्रदेश के खाद्य विभाग को प्राप्त हुई। गेहंू उठाव के लिए एफसीआई को हर महीने रविवार सहित अन्य सरकारी अवकाश के दिन भी डिपो खोलने पड़ रहे हैं, जिससे मजदूरों को भी अतिरिक्त पारिश्रमिक का भुगतान करना पड़ रहा है।

राशन डीलर्स द्वारा पैसे जमा नहीं कराने के कारण देरी
राशन की दुकान पर अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थियों को 1 रुपए प्रति किलो और अन्य एनएफएसए लाभार्थियों को 2 रुपए प्रति किलो गेहूं दिया जाता है। राशन डीलर्स को प्रति किलो गेहूं पर करीब सवा रुपए कमीशन मिलता है। उसको 75 से 80 पैसे प्रति किलो गेहूं के अनुसार एडवांस में भुगतान करना होता है। तब खाद्य आपूर्ति निगम एफसीआई में पैसे जमा करवाकर गेहूं का आरओ कटवाती है लेकिन हर बार राशन डीलर्स पैसे देने में देरी कर देते हैं। उधर रसद विभाग कार्यालय में बिल पेंडिंग रहते हैं। जिसके कारण गेहूं उठाव में देरी हो जाती है। लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में दुगुना गेहूं उठाव हुआ था। चूंकि यह फ्री था इसलिए इस गेहूं का तेजी से उठाव हो गया।

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‘हर बार उठाव की अवधि बढ़ानी पड़ती थी जिसके कारण अगले महीने के गेहूं उठाव में परेशानी हो रही थी। तंत्र में सुधार के लिए थोड़ी सख्ती की गई है।’
-विजय पाल सिंह, महाप्रबंधक, राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम जयपुर