10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सर्दी बढ़ी तो गिद्धों को रास आने लगी सूर्यनगरी

लंबे अर्से बाद मध्यपूर्व एशिया से आने वाले ग्रिफॉन की संख्या एक हजार से अधिक
2 min read
Google source verification
 सर्दी बढ़ी तो गिद्धों को रास आने लगी सूर्यनगरी

सर्दी बढ़ी तो गिद्धों को रास आने लगी सूर्यनगरी

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. मृत मवेशियों का भक्षण कर वातावरण को स्वच्छ बनाने वाले प्रवासी गिद्धों को सूर्यनगरी रास आ रही है। जोधपुर में बड़े पैमाने पर खनन, घने पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और आबादी क्षेत्रों के विस्तार के बावजूद प्रवासी गिद्धों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। देश के अन्य हिस्सों और स्पेन, चीन, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और यूरोप से मारवाड़ के मरुस्थलीय इलाकों में आने वाले प्रवासी गिद्धों की संख्या में कमी हो रही थी, लेकिन पिछले दो साल से संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। मृत मवेशियों को अपना भोजन बनाकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मददगार पर्यावरण मित्र पक्षियों की संख्या केरू डम्पिंग स्टेशन पर कारकस प्लांट लगने के बाद कम हुई है। पश्चिम एशिया, तिब्बत, मंगोलिया, नेपाल, मध्यपूर्व एशिया से स्टेपी ईगल, इजीप्शियन, ग्रिफॉन, सिनेरसिस, पेरिजिन, बाज, बजार्ड व स्नेक हेड ईगल आदि पक्षी पर्यावरण संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।

कौन कहां से ...
पर्यावरण मित्र पक्षियों में पश्चिम एशिया, साइबेरिया, तिब्बत, मंगोलिया व नेपाल से स्टेपी चील, अफ्रीका तथा यूरोपीय देशों से पराग्रीन फाल्कन, सऊदी अरब, इराक व कजाकिस्तान से विभिन्न प्रजातियों के बाज, हिमालय एवं मध्यपूर्वी एशिया से बजर्ड थार के विभिन्न इलाकों में पहुंचे है। उत्तर-पूर्व पाकिस्तान एवं नेपाल में पाई जाने वाले शिकारी प्रजाति के स्नेक टोड ईगल भी नजर आई है।

पर्यावरण संतुलन में मददगार
शिकारी पक्षी पर्यावरण संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिमालयन, यूरेशियन, सिनेरियस, इजिप्शियन सहित कई प्रजातियों के वल्चर मृत मवेशियों को ही अपना भोजन बनाते हैं जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। वन विभाग एवं पर्यटन विभाग को थार में चिह्नित स्थलों पर प्रवासी पक्षियों की समृद्ध परम्परा के संरक्षण के स्थाई प्रबंध करने चाहिए।
-शरद पुरोहित, पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ

फेक्ट फाइल
1. मेहरानगढ़ ,मसूरिया,सिद्धनाथ, दईजर अतीत में रहे गिद्धों के प्रमुख प्रजनन स्थल।
2. शहर के विकास और विस्तार के साथ परम्परागत आश्रय स्थल तबाह।
3. अब जोधपुर मात्र शीतकालीन प्रवास पर ही नजर आते है गिद्ध।
4. केरू डंपिंग स्टेशन पर सर्वाधिक संख्या।
5. पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और आश्रय स्थलों में अवैध खनन से घटी संख्या।
6 शीतकाल प्रवास में ग्रीफॉन की संख्या 1500 से अधिक होना अच्छा संकेत।
7. केरू डम्पिंग स्टेशन में कारकस प्लांट लगने के बाद मृत पशुओं के निस्तारण से गिद्धों की संख्या में कमी।