
पीपाड़सिटी पुलिस थाना में आवास निर्माण में बजरी का ढेर
पीपाड़सिटी.सुप्रीम कोर्ट की राज्य में बजरी खनन पर रोक के साथ राज्य सरकार अवैध खनन पर अंकुश का दावा कर रही है। उसके बाद भी निजी और सरकारी भवनों के निर्माण धड़ल्ले से चल रहे है। जब तक विकल्प न आ जाए तक तक यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि बजरी के बिना निर्माण कार्य सम्भव नहीं है। तो फिर बजरी आ कहाँ से रही है? सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए बजरी खनन पर रोक लगा रखी है। सरकार को निर्माण कार्यों में बजरी के उपयोग के स्थान पर वैकल्पिक स्रोत की पता कर उसके उपयोग का निर्देश दिया है। बजरी का विकल्प तो सामने आया नहीं पर ये निर्देश जरूर फाइलों में ही दबकर रह गए है।
अवैध बजरी खनन जोरों पर-
उपखण्ड क्षेत्र की जोजरी नदी अवैध बजरी खनन से जगह-जगह खदानों का रूप लेने लगी है। इसमे दिन रात बजरी खनन के माफिया खुले आम अवैध खनन से लाखों रुपयों की वसूली कर रहे है। दिन रात जे सी बी, डंपर के साथ ट्रैक्टर व ट्रकों से बजरी को भर कर तिगुने और चौगुने दामों पर बेचा जा रहा है। इस रोक का फायदा खनन माफिया को ही हुआ है। उन्हें अब इस धंधे में ज्यादा कमाई मिलने लगी है। इस कारण खवासपुरा, कोसांना, नानण, पीपाड़ सिटी, रियां, बेनण, जातियावास सहित अन्य गाँवों में जोजरी नदी का बजरी खनन में अवैध दोहन से भविष्य में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की आाशंका है।
न्यायिक आदेश बेअसर-
जब कोर्ट ने बजरी खनन पर रोक लगा दी है तो उसका उपयोग करने को वैध कैसे माना जा सकता है? पुलिस थानों के साथ निर्माण विभाग के सरकारी भवनों के निर्माण में खुले आम अवैध बजरी का उपयोग हो रहा है, लेकिन कागजी खाना पूर्ति में गरीब किसानों के बजरी से भरे ट्रक्टरों को जब्त करने की औपचारिकता पूरी की जाती है।
बजरी माफियाओं का आतंक-
क्षेत्र में अवैध बजरी माफियाओं का आतंक कितना है ये अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस के सामने शिकायतकर्ताओं को थाने में खुले आम चेतावनी देकर हत्या के प्रयास से नही चूकते है। ऐसी ही एक शिकायत पर पीपाड़सिटी थाना क्षेत्र में बजरी माफियाओं ने शिकायतकर्ता को हमला में गम्भीर रूप से घायल कर दहशत पैदा कर दी। उसके बाद कोई शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
राजनीतिक और पुलिस संरक्षण-
बजरी माफियाओं को राजनीतिक और पुलिस का दो तरफ वरदहस्त मिलने की सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ये सुरक्षा कवच बिना मासिक बंदी के नही मिल सकता। अवैध खनन के शिकायत कर्ता की सूचना पर पुलिस का देरी से पहुंचना और माफियाओं की इसकी भनक लगना मिलीभगत के बिना सम्भव नही है। रियां गांव में ऐसी ही शिकायत पर उपजिला मजिस्ट्रेट की सूचना को नजर अंदाज़ कर दिया गया, लेकिन उपजिला मजिस्ट्रेट रिछपाल सिंह बुरड़क अकेले ही मौके पर पहुँच गए और डंपर को रोक लिया पुलिस को फटकार लगाई तो कार्रवाई हुई। राजेश मेहरड़ा—निसं
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पुलिस का सहयोग नहीं-
अवैध बजरी खनन मामलों में पुलिस का सहयोग नहीं मिलता। कई बार जब्त वाहन को पुलिस नहीं लेती है और मुकदमा दजऱ् करने में देरी करती है।
राजीव चौधरी,अधीक्षण अभियंता (सतर्कता),खान विभाग जोधपुर।
पांच के खिलाफ कार्रवाई-
राजस्व भूमि में किसी प्रकार का अवैध खनन करने पर पांच प्रकरणो में खातेदारी अधिकार समाप्त किए है।
रिछपाल सिंह बुरड़क, उपजिला कलक्टर, पीपाड़सिटी।
मिलीभगत के बिना असंभव-
खान विभाग के कुछ कार्मिको की मिलीभगत से अवैध खनन होते है। वैसे उनको दबिश के लिए सुरक्षा में आर ए सी की टीम सौपी हुई है।
सेठा राम बंजारा, पुलिस उप अधीक्षक,बिलाड़ा
कई बार शिकायतें की-
अवैध बजरी खनन से जोजरी नदी खदान में बदल गई।उनके विरुद्ध कई शिकायतें की फिर भी कार्रवाई नही होती।बेख़ौफ़ होकर माफिया अपना काम करते है।
भानाराम भुडानियां,सरपंच नानण।
Published on:
06 Jun 2018 11:50 pm
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