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जहां शहरवासियों की सेहत बनाने करोड़ों की योजना वहीं पर हो रहा खिलवाड़

  कायलाना हाथी नहर से बड़ली रोड तक फैंका जा रहा सैंड स्टोन का वेस्टेज
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जहां शहरवासियों की सेहत बनाने करोड़ों की योजना वहीं पर हो रहा खिलवाड़

जहां शहरवासियों की सेहत बनाने करोड़ों की योजना वहीं पर हो रहा खिलवाड़

NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर पत्रिका अलर्टजोधपुर. सैंड स्टोन की वेस्टेज स्लरी का निस्तारण कायलाना के जलग्रहण क्षेत्र हाथी नहर से बड़ली रोड तक अंधाधुंध किया जा रहा है। सैंड स्टोन पाउडर से सिलिकोसिस बीमारी होती है जिसमें श्रमिकों को अस्थमा, टीबी, पथरी और सांस संबंधी बीमारियां आम है। अब यही पाउडर जोधपुर शहरवासियों की प्यास बुझाने वाले कायलाना व बख्तसागर के लिए खतरा बन चुका है। क्षेत्र में अंधाधुंध संचालित हो रही पत्थर काटने की इकाइयों की ओर से कायलाना जलाशय के जलग्रहण क्षेत्र में डाला जा रहा वेस्टेज न केवल पर्यावरण के लिए घातक है बल्कि मानवीय, जलीय जंतुओं मछलियों और पक्षियों के लिए भी खतरा बन चुका है। सैंड स्टोन इकाइयों की ओर से कायलाना हाथी नहर से बड़ली रोड के बीच मुख्य सड़क के किनारे स्टोन कटर वेस्ट डालने से क्षेत्र की जमीन बंजर होने का खतरा भी पैदा हो गया है।

नगर वन योजना पर मंडराया खतरा

शहरवासियों को जंगल के आनंद की अनुभूति कराने और प्राकृतिक छठा को निहारने के उद्देश्य से वन विभाग की 'नगर वनÓ योजना के तहत हाथी नहर केरू रोड पर 2 करोड़ की लागत से परियोजना प्रस्तावित है। उसी प्रस्तावित स्थल को चारों तरफ से स्लरी से पाटा जा रहा हैं। प्रस्तावित 'नगर वनÓ क्षेत्र में जोधपुर शहरवासी सुबह की सैर, योगा के साथ ग्रीनरी के बीच 10 से अधिक जैव विविधता से परिपूर्ण संसार से रूबरू करवाया जाना है। वनविभाग की जमीन डाले जा रही स्लरी को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्व विभाग, खनन विभाग राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी भी मौन है।

सब डाल रहे तो हम क्यों रहे पीछे कायलाना माचिया मार्ग पर अंधाधुंध बसों के सर्विस सेंटर खुलने के बाद जला हुआ ऑयल, बसों -ट्रकों के क्षतिग्रस्त कांच भी कायलाना जलग्रहण क्षेत्र और माचिया जैविक उद्यान की दीवार और गोरेश्वर महादेव के आसपास किया जा रहा। जला हुआ ऑयल बरसात में बहकर कायलाना में आने से जल प्रदूषण के साथ जलीय जीवों का विनाश निश्चित है।

पर्यावरण के लिए खतरा

कायलाना जलाशय के जलग्रहण क्षेत्र में सैंड स्टोन स्लरी पर्यावरण के लिए घातक है । इसे बंद नहीं किया गया तो शहरवासियों के साथ जलीय जंतुओं मछलियों और प्रवासी पक्षियों के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।

शरद पुरोहित, पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ