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झोंपड़ी में गुजारा करने को मजबूर द्वितीय विश्वयुद्ध के जवान कुम्भाराम भील की वीरांगना

बेलवा (जोधपुर). भारतीय सेना सेवा कोर के द्वितीय विश्वयुद्ध के जवान की पत्नी लाचारी की हालात में झोंपड़ी में जीवनयापन करने को मजबूर हैं, उन्हें पेंशन भी नहीं मिल रही है।
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Wife of second world war soldier in poverty

झोंपड़ी में गुजारा करने को मजबूर सैनिक द्वितीय विश्वयुद्ध के जवान कुम्भाराम भील की वीरांगना

बेलवा (जोधपुर). भारतीय सेना सेवा कोर के द्वितीय विश्वयुद्ध के जवान की पत्नी लाचारी की हालात में झोंपड़ी में जीवनयापन करने को मजबूर हैं, उन्हें पेंशन भी नहीं मिल रही है।

बेलवा राणाजी के कुम्भाराम पुत्र गिरधारीराम भील जालंधर केंट से सेना सेवा कोर में 3 जनवरी 1943 को भर्ती हुए थे। उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान कई देशों में सैनिक के रूप में अपनी सेवाएं दी। 8 सितम्बर 1946 को सेवा कोर से सेवामुक्त हो गए। जवान कुम्भाराम की मृत्यु के बाद सेना ने 1997 में एएससी जवानों की परिवार पेंशन का प्रावधान किया, जिससे कुम्भाराम की पत्नी को जनवरी 1997 से विधवा के रूप में पेंशन सेवा शुरू कर दी।

2006 तक सैनिक की पत्नी धूड़ी देवी (85)को सेना द्वारा पेंशन का हितलाभ दिया जा रहा था। लेकिन 2006 में उन्हें सैन्य कागजातों की पूर्ति का हवाला देते हुए पेंशन सेवा बंद कर दी। अब जवान की पत्नी बुढापे में तंगहाली में जिंदगी जी रही है। सेना के अधिकारियों से कई बार पेंशन सेवा शुरू करने की गुहार लगाने के बाद मात्र आश्वासन ही मिल पाए हैं।

रक्षामंत्री से लगाई गुहार

सेना में नौकरी की पारिवारिक पेंशन दिलवाने व न्याय दिलवाने को लेकर पूर्व डिप्टी पुंजराजसिंह इन्दा व पूर्व सैनिक बांकसिंह इन्दा कार्यवाही में लगे हुए हैं। धुड़ीदेवी भील ने रक्षामंत्री राजनाथसिंह व थल सेनाध्यक्ष को भी ज्ञापन भेजे हैं। इन्हें ढाणियों तक जाने का मार्ग व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नसीब नहीं हो पाई हैं।

इन्होंने कहा

कई बार गांवों में असाक्षर लोगों के कागजातों में हेराफेरी भी की जा सकती है। इनके सेना दस्तावेज की जांच कर उचित कार्यवाही की जाएगी।

लक्ष्मणसिंह राठौड़, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी