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video वाइल्डलाइफ टूरिज्म : जोधपुर के माचिया बायलॉजिकल पार्क में देखिए क्यूट नन्हे पैन्थर्स का एडवेंचर
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video वाइल्डलाइफ टूरिज्म : जोधपुर के माचिया बायलॉजिकल पार्क में देखिए क्यूट नन्हे पैन्थर्स का एडवेंचर

जोधप़ुर. अगर आप वाइल्ड लाइफ टूरिज्म के शौकीन हैं तो आप जोधपुर के माचिया बायलॉजिकल पार्क में वाइल्डलाइफ टूरिज्म का बखूबी मजा ले सकते हैं। यहां बड़े ही खूबसूरत और प्यारे से दिखने वाले नन्हे पैंथर्स की अठखेलियां सैलानियों को खूब लुभा रही हैं। उन्हें कुदरती माहौल जैसे इस पार्क में रहना अच्छा लगने लगा है। इन ३० दिन के तीन मखमली और क्यूट नन्हे पैन्थर्स को पशु चिकित्सक ५० ग्राम मीट का सूप और अमरीका से आयातित दूध पिला रहे हैं।      
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जोधपुर

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MI Zahir

Jan 17, 2019

 

जोधप़ुर. अगर आप वाइल्ड लाइफ टूरिज्म के शौकीन हैं तो आप जोधपुर के माचिया बायलॉजिकल पार्क में वाइल्डलाइफ टूरिज्म का बखूबी मजा ले सकते हैं। यहां बड़े ही खूबसूरत और प्यारे से दिखने वाले नन्हे पैंथर्स की अठखेलियां सैलानियों को खूब लुभा रही हैं। इन शावकों को सर्दी से बचाने के लिए पिंजरे में कम्बल बिछाए गए हैं तो पिंजरे के आगे भी कम्बल का पर्दा लगाया गया है। इनकी रोचक और मनोरंजक अदाएं देशी विदेशी सैलानियों को पसंद आ रही हैं। उन्हें कुदरती माहौल जैसे इस पार्क में रहना अच्छा लगने लगा है। इन ३० दिन के तीन मखमली और क्यूट नन्हे पैन्थर्स को पशु चिकित्सक ५० ग्राम मीट का सूप और अमरीका से आयातित दूध पिला रहे हैं। इन तीनों शावकों में से एक मादा और दो नर शावक है। दूध पीने के बाद तीनों शावक एक दूसरे के साथ अठखेलियां करते है। इनमें सर्वाधिक चंचल मादा पैंथर है। यह देख कर पर्यटक और खासकर बच्चे बहुत खुश होते हैं। इन शावकों के विश्राम के लिए विशेष पिंजरा बनाया गया है।

बिन मां के हैं ये बच्चे
वन विभाग की टीम को रैस्क्यू किए तीनों पैंथर शावकों की मां अंतिम बार ४ जनवरी को सेणा की पहाडि़यों में घायल अवस्था में नजर आई थी। जोधपुर से वन विभाग की रैस्क्यू टीम सेणा गांव पहुंच कर पांच दिनों तक सघन तलाश भी की थी। इसके बाद कुछ दिन पूर्व उसकी लाश जंगल में पड़ी मिली थी।

पाली से लाए गए हैं

इन नन्हे पैन्थर्स के वजूद कहानी भी बड़ी मार्मिक है। वन विभाग जोधपुर की टीम ८ जनवरी को इन्हें पाली जिले के बाली के सेणा पहाडि़यों से लाई थी। लावारिस अवस्था में रेस्क्यू किए ये तीन पैंथर शावक माचिया जैविक उद्यान को पसंद कर रहे हैं।

सूप पीना शुरू किया
माचिया जैविक उद्यान में तीनों शावकों के लिए न्यूनेटल वार्ड बनाया गया है, जहां किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है। मां के दूध से वंचित एक माह आयु के शावकों ने मंगलवार से मीट का सूप भी पीना शुरू कर दिया गया है।

‘पेटलकÓ दूध पिलाया जा रहा

पैंथर शावकों की नन्हें शिशुओं की तरह देखभाल करने वाले वन्य जीव चिकित्सक डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ ने बताया कि दो दिनों से प्रत्येक पैंथर शावक को १०० ग्राम मीट का सूप और दिन में दो बार अमरीका से आयातित बिल्ली प्रजाति के शावकों के लिए खास तौर से निर्मित ‘पेटलक Ó दूध पिलाया जा रहा है।

हाथों पर झपट्टे मार कर खरोंच
दूध पिलाने के दौरान बोतल में दूध खत्म होने पर मादा पैंथर शावक चिकित्सक के हाथों पर झपट्टे मार कर खरोंच के निशान ला चुकी है। तीनों शावकों पर २४ घंटे सीसी टीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है। समय पर दूध और आहार खिलाने के लिए वन्यजीव चिकित्सक सहयोगी महेन्द्र गहलोत भी दिन रात सेवा में जुटे हुए हैं।

अब तक २५ पैंथर बचा चुके है चिकित्सक राठौड़

पिछले आठ साल के दौरान जोधपुर, पाली, सिरोही, जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर व अजमेर जिलों में कुल २५ पैंथर रेस्क्यू कर चुके डॉ. श्रवणसिंह ने बताया कि यह पहला अवसर है जब एक साथ तीन शावक रेस्क्यू किए गए है। इससे पहले मां के दूध से वंचित तीन लॉयन शावकों लालन पालन कर बड़ा कर चुके डॉ. श्रवण ने बताया कि हाली ही में रेस्क्यू तीनों पैंथर शावक फिलहाल स्वस्थ है और उन्हें कुछ समय अवधि के बाद वन अधिकारियों के मार्गदर्शन में उदयपुर जैविक उद्यान को सुपुर्द कर दिया जाएगा।

कंक्रीट के जाल ने छीन ली मासूम पैंथर्स की जगह

पैन्थर्स की दुनिया में यह बदलाव आया है कि अब मारवाड़ के माउंट आबू के जंगलों व मेवाड़ के कुंभलगढ़ के प्राकृतवास छोड़ कर पैंथर भोजन पानी की तलाश में पाली सहित थार के रेगिस्तानी क्षेत्र में पहुंचने लगे हैं। पिछले दो महीनों के दौरान चार पैंथर जालोर, पाली, नागौर व जैसलमेर जिले में पहुंच चुके है। मुश्किल यह है कि भोजन पानी के लिए लंबी दूरी तय करने के दौरान ग्रामीणों के हत्थे चढ़ कर जान गंवा सकते हैं। नागौर जिले में हाल ही जोधपुर की रेस्क्यू टीम अगर १५ मिनट भी देर करती तो ग्रामीण पैंथर को लाठियों से पीट कर मार डालते। हर साल पैंथर के भटकाव की सूचनाओं के बावजूद वन विभाग इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। पैंथरों के भटकाव यही क्रम रहा तो भविष्य में ये लुप्त हो जाएंगे।

जलाशयों की कमी और अवैध खनन भी अहम कारक
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन, मवेशियों की संख्या में गिरावट और पारम्परिक पेयजल के स्रोत व चारागाहों में कमी पैंथर के प्रमुख आश्रय स्थलों पर मानवीय घुसपैठ बढऩे के साथ है। कुंभलगढ़ सेंचुरी, राजसमंद, पाली व उदयपुर की पहाडिय़ां पैंथर के प्राकृत आवास है। इन क्षेत्रों में पैंथर के प्राकृतिक भोजन कहे जाने वाले खुर वाले जानवर सांभर, नीलगाय, चौसिंगा, जंगली ***** आदि वन्यजीव खत्म हो चुके हैं। परम्परागत आवास में मानवीय हस्तक्षेप बढऩे, अवैध खनन, अतिक्रमण बढऩे से वैकल्पिक भोजन की तलाश में भटकते हुए रिहाइशी क्षेत्रों में पहुंचने लगे है। यही वजह है कि अब वन विभाग की ओर से पाली जिले के जवाई नहर के पास पैंथर को बचाने के लिए पैंथर क न्जर्वेशन रिजर्व क्षेत्र के विभिन्न पैंथर प्राकृतवास को चिह्नित कर योजना तैयार की जा रही है।