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बिना सीखे दिव्यांशु देते हैं माटी को विघ्नहर्ता का आकार

- चार साल से घर पर ही बनाते हैं माटी के गणेश  
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बिना सीखे दिव्यांशु देते हैं माटी को विघ्नहर्ता का आकार

बिना सीखे दिव्यांशु देते हैं माटी को विघ्नहर्ता का आकार

जोधपुर।
पर्यावरण संरक्षण के लिए मुहिम उठी कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का उपयोग न हो। माटी के गणेश के प्रति क्रेज बढ़ा तो बिना किसी से औपचारिक सीखे इस 21 साल के युवक ने अपनी कला को आकार देना शुरू किया। चार साल से घर पर माटी के गणेश बनाते हैं। गणेश चतुर्थी से कुछ दिन पहले इस काम में जुट जाते हैं और हर साल 40 से 50 विघ्नहर्ता के अलग-अलग आकार और स्वरूप तैयार करते हैं।

यह हैं परकोटा शहर के कल्लो की गली निवासी दिव्यांशु बोहरा। जब चार साल पहले गणेश प्रतिमा स्थापित करने के लिए बाजार से माटी की मूर्ति लेने गए तो पहली बार इनको यह ख्याल आया। अपने पिता जय प्रकाश बोहरा से उन्होंने मूर्तिकला के बेसिक्स सीखे और इसके बाद 2017 से ही इसमें जुट गए। महाराष्ट्र में जिस प्रकार से पड़े पांडाल में भगवान गणेश विराजते हैं उसी स्वरूप में दिव्यांशु माटी के गणेश तैयार करते हैं। इनकी माटी मूर्तियों की डिमांड शहर में रहती है।
ऑनलाइन मंगवाते हैं माटी और डालते हैं बीज

दिव्यांशु जो माटी के गणेश तैयार करते हैं उसकी थीम घर पर ही विसर्जन है। वे ऑनलाइन ई कॉमर्स कंपनियों से चार अलग-अलग प्रकार की माटी मंगवाते हैं। कलर करने के लिए इको-फ्रेंडली रंग उपयोग में लेते हैं। साथ ही मूर्ति बनाते समय माटी के भीतर ही सब्जियों व फलों के बीज भी डाल देते हैं। जिससे कि जब घर में गमले में विसर्जन हो तो वह पौधे के रूप में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे सके।