
साइकिल पर बैठे कान सिंह (फोटो पत्रिका नेटवर्क)
Jodhpur Kan Singh Bicycle from England: जहां साइकिल का चलन युवाओं के डेली रूटीन से हटकर सिर्फ फिटनेस तक सीमित हो रहा है। वहीं, जोधपुर शहर में एक ऐसे भी शख्स हैं, जो दशकों पुरानी अपनी साइकिल को आज भी चला रहे हैं।
बता दें कि उनकी साइकिल साल 1945 की रेले कंपनी मॉडल की है, जो इंग्लैंड में बनी है। शहर के रिटायर्ड टीचर कान सिंह गहलोत आज भी अपनी इस साइकिल को नई साइकिल की तरह रखते हैं।
कान सिंह बताते हैं कि उन्होंने इस साइकिल को साल 1962 में खरीदा था। इस साइकिल के अब तक किसी भी पार्ट में जंग नहीं लगा है। कई दशक पहले बनी इस साइकिल में गियर सिस्टम था, जो हाई गियर में लगभग 35 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाई जा सकती थी। यह एक एंटिक पीस बनी हुई है।
तीन जून यानी विश्व साइकिल दिवस, यह तारीख सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक विचार है कि हम एक बार फिर उस दो पहियों की दुनिया में लौटें, जिसने हमें चलना सिखाया था। कभी स्कूल का रास्ता था, कभी गांव की गलियों में दौड़ती दोस्ती की कहानी। आज वही साइकिल फिर से हमारी फिटनेस, पर्यावरण और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। वक्त बदला है पर साइकिल का महत्व अब और भी ज्यादा हो गया है।
रोजाना 40-60 मिनट साइकिल चलाने से मानसिक तनाव कम होता है। मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे रोगों से बचाव होता है। साइकिलिंग से दिल और फेफड़े की कार्यक्षमता बढ़ती है। मांसपेशियों को मजबूती और स्टैमिना में सुधार होता है और दवाओं पर निर्भरता कम होती है।
Updated on:
03 Jun 2025 10:02 am
Published on:
03 Jun 2025 10:01 am
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