
Sheetala mata - प्रदेश में शीतलासप्तमी पर हुई शीतला माता की पूजा-अर्चना, देखें Video...
Sheetala mata - माता शीतला की आराधना का पावन पर्व कई जगह सप्तमी को, तो कई जगह अष्टमी को मनाया जाता है। इस क्रम में शीतला सप्तमी का पावन पर्व गुरुवार को जोधपुर जिले के भोपालगढ़ कस्बे सहित क्षेत्र भर के ग्रामीण इलाकों में श्रद्घापूर्वक मनाया गया और इस दिन महिलाओं द्वारा विशेष पूजा-अर्चना किए जाने के साथ ही ग्रामीणों ने दिन भर ठंडा-बासी भोजन ही किया।
इस दिन सवेरे से ही महिलाओं ने माता के थान पहुंचकर शीतला माता की पूजा-अर्चना कर प्राकृतिक प्रकोप एवं आपदाओं से घर-परिवार की रक्षा करने की मन्नतें मांगी। वहीं कई महिलाओं ने अपने घरों के सामने चौक में छोटे-छोटे खेतों की प्रतिकृतियां व थान बनाकर पूजा-अर्चना की और इन खेतों में हल चलाकर बाजरी की बुवाई करते हुए शीतला माता से इस बार सावण में अच्छी फसल व सुकाल की कामना की।
वहीं महिलाओं ने इस मौके पर 'हळोतिया' करने के साथ ही गीत गाकर भी माता को रिझाया। इसके अलावा अपने छोटे बच्चों को माता की प्रसादी खिलाकर ओरी व अन्य बिमारियों से बचाव की प्रार्थना भी की। वहीं इस अवसर पर धार्मिक मान्यता के अनुसार घरों में चूल्हे नहीं जलाए गए और एक दिन पहले बुधवार को ही बनाया गया ठंडा-बासी भोजन ही किया।
वहीं दूसरी ओर शुक्रवार को शीतला अष्टमी के मौके पर भोपालगढ़ क्षेत्र के रजलानी ग्राम में मेला भरा जाएगा, जिसमें सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण व महिलाएं पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगीं।
यह है शीतला सप्तमी की मान्यता
भोपालगढ़ कस्बे की महिला श्रद्धालु स्नेहा एमपी देवड़ा ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में ऐसी मान्यता रही है, कि भगवान के पसीने से एक प्रकार का ज्वर पैदा होता है, जिसे माताजी अथवा ओरी निकलना कहा जाता है। इससे राहत दिलाने के लिए ब्रह्माजी ने यज्ञ किया था। जिसमें से एक देवी प्रकट हुई, जिन्हें शीतला माता कहा गया। किवंदती है कि होली के बाद सातवें दिन शीतला सप्तमी पर ठंडे-बासी भोजन से माता शीतला की पूर्जा-अर्चना कर इस दिन केवल ठंडा-बासी भोजन ही ग्रहण किया जाता है, तो परिवार में माताजी यानि ओरी निकलने जैसे प्रकोप का सामना नहीं करना पड़ता है।
Published on:
24 Mar 2022 03:30 pm
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