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छत्तीसगढ़ सरकार के विकास के दावे हुए फेल, यहां आज भी एक गांव ऐसा है जो नहीं जानता कौन है मोदी और रमन

छत्तीसगढ़ सरकार विकास के बड़े-बड़े दावा करते भले ही थक नहीं रही हो, लेकिन जमीनी सच्चाइयां इससे एकदम उलट है।
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कांकेर

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Deepak Sahu

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Updated: 6 Nov 2018, 1:01 PM IST

villagers

छत्तीसगढ़ सरकार के विकास के दावे हुए फेल, यहां आज भी एक गांव ऐसा है जो नहीं जानता कौन है मोदी और रमन

धीरज बैरागी@पखांजूर. छत्तीसगढ़ सरकार विकास के बड़े-बड़े दावा करते भले ही थक नहीं रही हो, लेकिन जमीनी सच्चाइयां इससे एकदम उलट है। सरकार के 15 साल के शासन के बाद भी कई गावों के लोग झरिया और तालाब का पानी पीने को मजबूर हैं।विकास की किरण गांव तक नहीं पहुंची है। जबकि सरकार सभी गांवों में विकास की गंगा बहाने का झूठा दावा कर रही है।

राज्य सरकार के दावा का सच जानने पत्रिका टीम पखांजूर मुख्यालय से 60 किमी दूर ग्राम पंचायत बसा कंदाडी के आश्रित ग्राम हिदुर पहुंची तो विकास के सभी दावे खोखले साबित हो रहे थे। ग्रामीणों को यह भी नहीं मालूम कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का नाम क्या है।

ग्रामीणों ने कहा कि आज तक गांव में सड़क नसीब नहीं हुई है।पगडंडी के सहारे पैदल सफर करने को ग्रामीण मजबूर है। बरसात में छोटी बड़ी नदी नाला तबाही मचाते हैं। बारिश के दिनों में मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह से कट जाता है।ग्रामीणों ने कहा कि आज भी वे झरिया और तालाब का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कहा कि हमारे लिए साफ पानी का बंदोबस्त आज तक नहीं करा गया तो विकास कहां हुआ है।

ग्रामीणों ने कहा कि गांव में किसी तरह से एक हैंडपंप लगा वह भी एक साल से खराब पड़ा है। झरिया के पानी से प्यास बुझाने को मजबूर हैं। दूषित पानी पीकर गांववालों को बीमारी का शिकार होना पड़ता है। ग्रामीणों की माने तो जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि से मूलभूत सुविधाओं की मांग की है।उसके बाद भी यहां रहने वाले आदिवासी परिवारों को सुविधाएं नहीं है। ग्रामीणों ने कहा न तो हम किसी सरकार को जानते हैं न ही यहां कोई नेता आया है।

सरकार की नाकामी कहे या इन ग्रामीणों का दुर्भाग्य, हिदुर गांव में रहने वाले ग्रामीणों को आजतक यह नहीं पता कि उनका विधायक, सांसद कौन है। न तो इस गांव में कभी सांसद पहुंचे न ही विधायक अपना दर्शन दे पाए हैं। ग्रामीणों को यह भी नहीं मालूम कि हमारे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कौन हैं।

जैसे ही हिदुर के लिए हम रवाना हुए सबसे पहले बेठिया नदी में माओवादियों द्वारा बैनर लगाया गया है। बैनर में साफ शब्दों में लिखा था कि ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार करें और राजनीति दलों को मार भगाएं। कंदाडी गांव पार करने पर हिदुर के नजदीक लालरंग का माआवादी स्मारक बना था। इधर-उधर नजर दौड़ाने के बाद देखने में लगा कि आज भी यहां के लोग लाल आतंक से जकड़े हुए हैं।

गांव में चिकित्सा सुविधा नहीं है। ग्रामीण ने कहा कि छोटी-बड़ी बीमारी होने पर उन्हें गांव में झाडफ़ूंक पर निर्भर रहना पड़ता है। इलाज के अभाव में कई जाने भी जा चुकी है। गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची, शाम होते ही गांव में जंगली जानवरों का भय बढ़ जाता है।