5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ठेकेदार की मनमानी से प्रधानमंत्री सड़क निर्माण में मानकों का नहीं हो रहा पालन

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत बन रही सडक़ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है।

2 min read
Google source verification
Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana

ठेकेदार की मनमानी से प्रधानमंत्री सड़क निर्माण में मानकों का नहीं हो रहा पालन

कांकेर/पखांजूर. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत बन रही सडक़ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है। एल-52 उलिया से तुमरिटोला तक डेढ़ किमी की सडक़ का निर्माण मानक के आधार पर नहीं किया जा रहा है। मोसमटोला से पानावर पीव्ही 100 तक भी सडक़ बन रही है। दोनों सडक़ों में लैंडमार्क रॉयल इंजि. 9 प्रालि. के ठेके में बन रही है। उक्त ठेकेदार ने नियम को ताख पर रखकर रोड का निर्माण करा रहा है। नियम के आधार पर सडक़ निर्माण के लिए प्रथम चरण में 20-20 सेंटीमीटर में दो लेयर में मुरुम डालना अनिवार्य है।

दो परत के मरुम को पानी मारकर रोलर से दबाया जाना भी है। मानक के आधार पर ठेकेदार की ओर से मुरुम नहीं डाला जा रहा है। सडक़ के आसपास से सिर्फ मिट्टी ही डाला जा रहा है। ग्रामीणों के विरोध के बाद भी न तो रोलर चलाया जा रहा न ही मानक के आधार पर सडक़ को बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने सडक़ को मानक के आधार पर बनाने बात कही तो ठेकेदार मनमानी पर उतर आया।

इस संबंध में पत्रिका ने ग्रामीणों से जानकारी ली तो सडक़ निर्माण पूरी तरह से खराब निर्माण होना बताया जा रहा हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की साठगांठ से इस तरह का काम ठेकेदार करा रहा है। उलिया अंदुरुनी क्षेत्र होने के चलते संबंधित विभाग के इंजीनियर भी निर्माण स्थल की जांच के लिए नहीं आते हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के अधिकारियों से इस संबंध में बात करने की कोशिश किया गया तो कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हुए। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा कि जिन अधिकारियों की मॉनिटरिंग में सडक़ का निर्माण कराया जाना है, वह मौके पर ही नहीं रह रहे हैं।

ऐसे में ठेकेदार मनमानी करते हुए 20-20 सेंटीमीटर में दो लेयर में मुरुम नहीं डाल रहा है। मुरुम के बाद 20 सेमी. मोटी लेयर में मिश्रित गिट्टी (डब्ल्यूएमएम) को डाला जाना है। मिश्रित गिट्टी के ऊपर 7 सेमी में पत्थर की गिट्टी डामर के साथ डालना है। अंतिम में 2.50 सेमी के लेयर में डामर युक्त गिट्टी डालना है। अंदर गांव होने के कारण सडक़ निर्माण में मानक की खुलेआम धज्जियां अधिकारियों की अनदेखी से की जा रही है। बहरहाल इस सडक़ पर अभी मुरुम का लेयर ही पड़ा है, जो प्रथम चरण के निर्माण में गुणवत्ता की पोल खोल रहा है। एसडीओ प्रधानमंत्री सडक़ योजना ने कहा कि उक्त मामले में शिकायत होने पर ही जांच होगी।

जिस सडक़ निर्माण की निगरानी एसडीओ को करनी है, उसमें वह अपने आप को बचाने के लिए किसी की शिकायत का इंतजार कर रहे हैं। यानी सडक़ पूरी तरह से घटिया बन भी जाए तो जिम्मेदार अधिकारी तब तक जांच नहीं करेंगे जब तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हो सके। यानी सरकारी तंत्र का सरकारी नमुना और घटिया निर्माण पखांजूर क्षेत्र में खुलेआम चल रहा है।