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बेहद खौफनाक है यह इलाका, इस वजह से यहां आने से डरता है हर टीचर

पदोन्नति के बाद एचएम से व्याख्याता बने शिक्षकों ने नक्सलियों के भय से कोयलीबेड़ा, अंतागढ़, दुर्गूकोंदल और भानुप्रतापपुर के हाई स्कूलों में पढ़ाने से हाथ खड़े कर दिया है।

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Ashish Gupta

Jul 15, 2017

naxal terror

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कांकेर.
पदोन्नति के बाद एचएम से व्याख्याता बने शिक्षकों ने नक्सलियों के भय से कोयलीबेड़ा, अंतागढ़, दुर्गूकोंदल और भानुप्रतापपुर के हाई स्कूलों में पढ़ाने से हाथ खड़े कर दिया है। शहर के पास हाई स्कूलों में पद खाली नहीं मिलने के कारण पदोन्नति के बाद 21 व्याख्याता अपने मूलशाला में ही सेवाएं देंगे। यानी इस साल भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के हाई स्कूलों को एक भी व्याख्याता नहीं मिलेंगे।


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जानकारी के अनुसार अभी हाल ही में जिले के 39 शिक्षकों की पदोन्नति के बाद शिक्षा विभाग द्वारा व्याख्याता बनाया गया है। इसमें से 18 शिक्षक जुगाड़ से जिला मुख्यालय के आसपास के ब्लाकों में ज्वाइनिंग ले ली है। शेष 21 शिक्षकों को नक्सली प्रभावित ब्लॉक कोयलीबेड़ा, अंतागढ़, दुर्गूकोंदल और भानुप्रतापपुर भेजा जा रहा है।


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नक्सलियों के भय के चलते व्याख्याताओं ने वहां के स्कूलों में ज्वाइनिंग करने से मना कर दिया है। अपनी पदोन्नति को छोड़ अब मूलशाला में ही सेवाएं देने शिक्षा विभाग में गुहार की है। ऐसे में शिक्षा विभाग के अफसर असमंजस में बने हुए हैं। आखिर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में व्याख्याताओं की कमी को कैसे दूर की जाएगी। अंचल के हाई स्कूलों में व्याख्याता की कमी के चलते शिक्षण प्रभावति हो रहा है। यानी इस साल भी विभाग को विषयवार शिक्षकों का टोटा बना रहेगा।


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अधिकांश हाई स्कूलों में सीट खाली

शिक्षा विभाग और जिला पंचायत की ओर से शिक्षकों को पदोन्नति के बाद व्याख्याता बनाया जाता है। जिला पंचायत विभाग की ओर से व्याख्याता के पद पर पदोन्नति कुछ माह पहले हो चुकी है। इन व्याख्याताओं की तैनाती जिला मुख्यालय के आसपास के ब्लॉकों में मनमानी ढंग से कर दी गई है। शिक्षा विभाग की ओर से पदोन्नति की प्रक्रिया देर में पूरी होने से मुख्यालय के आसपास के स्कूलों में सीट खाली नहीं होने पर उन्हें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। व्याख्याता बने शिक्षक वहां जाने से मना कर दिया है।