
मां का दूध है बच्चे के लिए अमृत, शर्माएं नहीं जरूर कराएं स्तनपान
लखनऊ. मां का पहला दूध बच्चे के लिए अमृत समान होता है, जो उसे पोषण प्रदान करता है। वहीं मां के लिए भी स्तनपान कराना दुनिया का सबसे बड़ा सुख होता है। माता का दूध शिशु के उत्तम विकास के लिए जरूरी है तो उसे बीमारियों व संक्रमणों से बचाने के लिए परम आवश्यक भी। चूंकि नवजात शिशु पूर्णत: माता के दूध पर आश्रित रहता है तथा उसका संपूर्ण आहार ही माता का दूध होता है। यह जागरुकता फैलाने के लिये प्रदेश के सभी अस्पतालों में विश्व स्तनपान सप्ताह एक से सात अगस्त तक मनाया जाएगा।
क्यों मनाया जाता है विश्व स्तनपान सप्ताह
प्रत्येक वर्ष अगस्त माह के पहले सप्ताह प्रताप 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्तनपान एवं कार्य को दृढ़तापूर्वक एकसाथ करने का समर्थन देता है। साथ ही इसका यह उद्देश्य है कि कामकाजी महिलाओं को उनके स्तनपान संबंधी अधिकार के प्रति जागरूकता प्रदान करना। साथ ही कार्यालयों में भी इस प्रकार का माहौल बनाना की स्तनपान कराने वाली महिलाओं को किसी भी प्रकार की असुविधाएं ना हो। डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के अनुसार नवजात शिशु के लिए पीला गाढ़ा चिपचिपा युक्त मां का के स्तन का दूध कोलेस्ट्रम संपूर्ण आहार होता है जिसे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद 1 घंटे के भीतर ही शुरू कर देना चाहिए।
यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण की सचिव वी हेकाली झिमोमी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में औसतन 25 फ़ीसदी बच्चे जन्म के एक घंटे के अंदर मां का स्तनपान नहीं कर पा रहे हैं। मां के दूध में पोषक तत्व व एंटीबॉडी बच्चे को निरोगी बनाने में प्रथम टीके की तरह काम करती है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन बाल स्वास्थ्य महाप्रबंधक डॉ. अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि प्रदेश में स्तनपान के प्रचार के लिए हामदर्श एब्सोल्यूट अफेक्शन नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है ताकि स्तनपान को प्राथमिक व्यवहार में लाया जा सके। उन्होंने बताया कि सभी अस्पतालों में 1 अगस्त से 1 सप्ताह तक स्तनपान सप्ताह बना कर प्रचार प्रसार किया जाएगा। केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद के सदस्य डॉ. अनिरुद्ध शर्मा ने बताया कि जन्म के बाद शिशु को संपूर्ण आहार की जरूरत होती है। डारफिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान बताते हैं कि मां का दूध विशेष रूप से शिशु के लिए ही बना है। यह शिशु के विकास के लिए पोषण तो देता है साथ ही पचाने में भी आसान होता है। इस में पाए जाने वाले तत्व शिशु को सभी संक्रामक रोगों की सुरक्षा प्रदान करते हैं।
कैसे बच्चे के लिये गुणकारी स्तनपान
बोतल से दूध पिलाने की बजाय मां का स्तनपान न केवल सुविधाजनक है, बल्कि इससे धन व समय की बचत भी होती है। यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। यह मां व शिशु के बीच प्यार व बच्चे की सुरक्षा की भावना को भी बढ़ावा देता है। महिलाओं को जल्दी स्तनपान शुरू कराने व बार बार स्तनपान कराना चाहिये। इससे स्तनपान में सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है। बार बार स्तनपान कराने से बच्चे की पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है व उसे जरूरी पोषक तत्व मिलते रहते हैं और शिशु स्वस्थ्य रहता है। इससे मातायें भी अपने पुराने शारीरिक आकार को प्राप्त करती है। शिशु के शरीर में होने वाली पानी की मात्रा की पूर्ति करने मे मां का दूध सर्वाेत्तम है। जबकि बाजार के दूध में पानी की मात्रा का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है, जो बच्चे के लिये हानिकारक भी है।
स्तनपान न कराने से मां को होने वाले नुकसान
बच्चे के जन्म के बाद मां व शिशु का अनमोल रिश्ता होता है। दोनों एक दूसरे के पूरक होते हैं। मां का दूध न मिलने से अगर बच्चे में रोगों की सम्भावना बढ़ती है। तो स्तनपान न कराने से मां को स्तन सम्बन्धी व अन्य बीमारियां घेर लेती हैं। स्तनपान न कराने से गर्भाशय न सिकुड़ना, प्रसव के बाद रक्तश्राव में कमी न होना, अनीमिया की सम्भावना बढ़ जाती है। जो मां के लिये घातक व जानलेवा साबित होती है। जबकि स्तनपान मां के शारीरिक आकार को फिर से पुरानी अवस्था में लाने में सहायता करता है। जो मां अपने बच्चों को स्तनपान नहीं कराती है। उन्हें अण्डाशय एवं स्तन कैंसर होने की सम्भावना ज्यादा रहती है। क्योकि मां अपना दूध बच्चे को नहीं पिलाती है, तो दूध स्तनों में ठहरकर गांठों के रूप में एकत्रित हो जाता है। जो गम्भीर बीमारियों को दावत देती है।
Published on:
01 Aug 2018 01:19 pm
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