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Kannauj में प्रोटोकॉल विवाद: मंत्री असीम अरुण को इंतजार कराना पड़ा भारी, डीएम को लिखा पत्र

Kannauj में राज्य मंत्री असीम अरुण के दौरे के दौरान डीएम द्वारा इंतजार कराने का मामला सामने आया, जिससे नाराज़ मंत्री कार्यक्रम छोड़कर लौट गए और पत्र लिखकर आपत्ति जताई।

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कन्नौज में मंत्री को इंतजार पड़ा भारी, नाराज़ होकर कार्यक्रम से लौटे असीम अरुण (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

कन्नौज में मंत्री को इंतजार पड़ा भारी, नाराज़ होकर कार्यक्रम से लौटे असीम अरुण (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Kannauj  Protocol: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जनपद से एक अहम प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन के बीच समन्वय और प्रोटोकॉल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के जिला दौरे के दौरान जिलाधिकारी आशुतोष अग्निहोत्री द्वारा कथित रूप से उन्हें इंतज़ार कराने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना से नाराज़ मंत्री कार्यक्रम स्थल से वापस लौट गए और बाद में उन्होंने डीएम को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

जानकारी के अनुसार, राज्य मंत्री असीम अरुण कन्नौज के एक निर्धारित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। यह दौरा पहले से तय था और प्रशासनिक स्तर पर इसकी पूरी तैयारी भी की गई थी। हालांकि, जब मंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, तो वहां जिलाधिकारी आशुतोष अग्निहोत्री की अनुपस्थिति बताई गई। सूत्रों के मुताबिक, मंत्री को काफी समय तक इंतजार करना पड़ा, जिससे वे असहज महसूस करने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंत्री कुछ समय तक कार्यक्रम स्थल पर रुके रहे, लेकिन जब उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि जिलाधिकारी कब तक पहुंचेंगे, तो उन्होंने कार्यक्रम में शामिल हुए बिना ही वापस लौटने का निर्णय लिया। इस दौरान उनके साथ मौजूद अधिकारियों और कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति बनी रही।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मंत्री असीम अरुण ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन मानते हुए गंभीरता से लिया। उन्होंने जिलाधिकारी को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी नाराज़गी दर्ज कराई है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि एक मंत्री के दौरे के दौरान इस प्रकार की लापरवाही न केवल अनुचित है, बल्कि यह प्रशासनिक समन्वय की कमी को भी दर्शाता है।

सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि इस तरह की घटनाएं सरकार की छवि को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने अपेक्षा जताई है कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा न हो और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। वहीं, जिलाधिकारी आशुतोष अग्निहोत्री की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, प्रशासनिक हलकों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि यह केवल समय प्रबंधन की समस्या हो सकती है, जबकि अन्य इसे गंभीर चूक के रूप में देख रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। आम लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही मान रहे हैं, तो कुछ इसे संचार की कमी का परिणाम बता रहे हैं। गौरतलब है कि असीम अरुण उत्तर प्रदेश सरकार में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और वे पूर्व आईपीएस अधिकारी भी रह चुके हैं। ऐसे में उनके द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाना स्वाभाविक माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, कन्नौज में घटित यह घटना न केवल एक स्थानीय प्रशासनिक मुद्दा है, बल्कि यह व्यापक स्तर पर शासन-प्रशासन के बीच तालमेल की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। आने वाले समय में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए अधिक सतर्कता और बेहतर समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।