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161 साल पुरानी है ये नहर, जानिए कैसे 5 हजार गांवों की बनी जीवनदायिनी

महंगाई के चलते गरीब किसान निजी नलकूप की सुविधा नहीं जुटा पाते हैं। ऐसी स्थिति में मैनपुरी से निकली 161 साल पुरानी रामगंगा कमांड निचली गंग नहर कई शाखाओ मे बंटकर कानपुर देहात के हजारों गांवो की खेती को सिंचित कर उनकी जीवनदायी बनी हुई है।

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UP Patrika

Jul 14, 2016

kanpur

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कानपुर.
भारत एक कृषि प्रधान देश कहा जाता है। जिसका मुख्य कारण ये है कि भारत के 75 प्रतिशत भूभाग में सिर्फ पानी है, बचा हुआ भाग स्थल है। जिसमें किसान खेती का काम करते हैं। लेकिन वर्तमान परिवेश में किसानों को खेती की सिंचाई के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ जहां बारिश कम होती है, वहीं दूसरी तरफ नलकूपों की दुर्दशा किसानों पर दोहरी मार कर रही है। महंगाई के चलते गरीब किसान निजी नलकूप की सुविधा नहीं जुटा पाते हैं। ऐसी स्थिति में मैनपुरी से निकली 161 साल पुरानी रामगंगा कमांड निचली गंग नहर कई शाखाओ मे बंटकर कानपुर देहात के हजारों गांवो की खेती को सिंचित कर उनकी जीवनदायी बनी हुई है। जिससे किसान खेंतो में सिंचाई कर समस्याओं से उबर पाते हैं। वहीं सीमांत किसान धन न जुटा पाने पर पानी के अभाव में अपनी बर्बाद फसलों को देखते रह जाते हैं, लेकिन जिन गांवो से सटी हुई ये नहर गुजरी है। उन गांवो के लिये ये जीवनदायिनी साबित हो रही है। किसान नहर से खेंतो में सिंचाई करके अपनी फसल को बर्बाद होने से बचा लेते हैं।


इतनी ब्रांचो में विभाजित होकर दे रही है लाभ
निचली रामगंगा कमांड इटावा नहर की स्थापना 1855 में हुई थी। 161 वर्ष पुरानी ये नहर मैनपुरी जिले से जेडा रेगुलेटर नरौंख मेन ब्रांच से निकलकर 177 किलोमीटर की दूरी तय करती है। जिसके बाद वह पश्चिमी नहर, इटावा, भोगनीपुर, कानपुर होते हुए कई ब्रांचो में विभाजित होकर किसानों को खेती में लाभ पहुंचा रही है। लेकिन किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिये ये नहर प्रत्येक जिले में कई बम्बा, रजबहा मे बंट गयी है। जिससे अधिकांश किसानों के खेतों तक इसका पानी पहुंचाया जा सके। देखा जाए तो इटावा से कानपुर देहात के झींझक से लेकर रूरा तक करीब 169 किमी की दूरी तय करने वाली ये नहर करीब 5 हजार गांवो को लाभांवित कर रही है। पिछली सरकार में किसानो को नहर से सिंचाई करके आबपासी के रूप में उसका मूल्य चुकाना पडता था। लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार की निशुल्क सिंचाई योजना के चलते किसानों के खेतों को निशुल्क पानी मिल रहा है।


विश्व बैंक परियोजना से होगा पक्का निर्माण

किसानों की जीवनदायिनी बनी इस नहर में पानी की कमी होने के चलते सिंचाई विभाग ने नहर को पक्का कराने की पहल जब शुरू की है। तो विश्व बैंक के तहत इस परियोजना को लागू करने की कवायद शुरू की गई है। आपको बताते दें कि रामगंगा कमांड नहर कच्ची होने के चलते नहर के किनारे कट जाने और भूतल में पानी का रिसाव ज्यादा होने के चलते पानी का नुकसान होता है। क्योंकि पानी का संचय करने पर ये समस्या खड़ी हो जाती है। जिससे किसानों को लाभांवित कराने का लक्ष्य अधूरा रह जाता है। समय समय पर सिल्ट सफाई कराने में भारी दिक्कतों का सामना करना पडता है। लेकिन पक्का होने के बाद ये समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। सिंचाई विभाग अवर अभियंता विनोद कटियार ने बताया कि 177 किमी की दूरी में बनी ये नहर लोगों को लाभ पहुंचा रही है। जल्द ही विश्व बैंक परियोजना द्वारा किसानों को ये लाभ मिलेगा।

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