निचली रामगंगा कमांड इटावा नहर की स्थापना 1855 में हुई थी। 161 वर्ष पुरानी ये नहर मैनपुरी जिले से जेडा रेगुलेटर नरौंख मेन ब्रांच से निकलकर 177 किलोमीटर की दूरी तय करती है। जिसके बाद वह पश्चिमी नहर, इटावा, भोगनीपुर, कानपुर होते हुए कई ब्रांचो में विभाजित होकर किसानों को खेती में लाभ पहुंचा रही है। लेकिन किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिये ये नहर प्रत्येक जिले में कई बम्बा, रजबहा मे बंट गयी है। जिससे अधिकांश किसानों के खेतों तक इसका पानी पहुंचाया जा सके। देखा जाए तो इटावा से कानपुर देहात के झींझक से लेकर रूरा तक करीब 169 किमी की दूरी तय करने वाली ये नहर करीब 5 हजार गांवो को लाभांवित कर रही है। पिछली सरकार में किसानो को नहर से सिंचाई करके आबपासी के रूप में उसका मूल्य चुकाना पडता था। लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार की निशुल्क सिंचाई योजना के चलते किसानों के खेतों को निशुल्क पानी मिल रहा है।