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परदेसियों का मुंह नहीं ताकेंगे, भारत खुद बनाएगा एके-47

तिरंगे की बढ़ेगी ताकत.... कानपुर की आयुध फैक्ट्री में बनेगी असाल्ट राइफल, रूस के साथ स्वदेशी एके-47 बनाने का करार हुआ

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ak47

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आलोक पाण्डेय

कानपुर. अब विदेशियों पर निर्भरता नहीं रहेगी। दुनिया की फौजों की पहली पसंद असाल्ट राइफल एके-47 का निर्माण अब देश की आयुध फैक्ट्रियों में होगा। इस वास्ते रूस के साथ भारत का करार हो चुका है। उम्मीद है कि इसी वर्ष सितंबर से कानपुर सहित देश की चुनिंदा छह अन्य आयुध फैक्ट्रियों में एके-47 बनने लगेगी। कानपुर आयुध फैक्ट्री में एके-47 के कंपोनेंट की डिजाइन पहुंच गई है। यहां एक साल में बीस हजार असाल्ट राइफल बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।


अप्रैल में समझौता, सितंबर से उत्पादन

गौरतलब है कि अभी तक एके-47 के लिए भारत को रूस के साथ-साथ स्वीडन, इजराइल, अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ता था। कारण यहकि रूस में ईजाद हुई इस नायाब असाल्ट राइफल को बनाने के लिए भारत के पास तकनीकी और पेटेंट नहीं था। अब ऐसा नहीं होगा। बीते महीने भारत के रक्षा मंत्रालय ने रूस की सबसे बड़ी हथियार निर्माता कंपनी ‘कलाश्निकोव कंसर्न’ के साथ करार किया है। इस अनुबंध के मुताबिक, रूस और भारत की आयुध फैक्ट्री एके-47 के नए और अतिआधुनिक वर्जन को मिलकर बनाएंगी। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारत की क्लोदिंग निर्माणियों को छोडकऱ अन्य सभी आयुध निर्माणियों में एक-47 के तमाम कंपोनेंट तैयार किए जाएंगे। करार पर अमल करने के लिए आयुध निर्माणी बोर्ड के सदस्य की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित की गई है। गौरतलब है कि कानपुर शहर में तीन आयुध निर्माणियां हैं, जहां पर मौजूदा समय में धनुष और सारंग तोप के साथ-साथ पिनाक राकेट लांचर, रिवाल्वर, कारबाइन, लाइट मशीन गन का निर्माण किया जाता है। अब यहां पर भी एके-47 के कंपोनेंट तैयार होंगे। एके-47 के निर्माण का आदेश जारी होते ही कानपुर आयुध निर्माणियों के हजारों कर्मचारियों में खासा उत्साह है। उनका कहना है कि एके-47 के निर्माण से निर्माणियों में वर्कलोड की कमी नहीं होगी और यह निर्माणियों के लिए संजीवनी की तरह काम करेगी।


भारत को एके-100 भी बेचेगा रूस

नए अनुबंध में एके-47 की तकनीकी मुहैया कराने के साथ-साथ एके सीरिज की नई असाल्ट राइफल एके-100 की खरीद-फरोख्त का समझौता भी हुआ है। रूस की हथियार निर्माता कंपनी ‘कलाश्निकोव कंसर्न’ के सीईओ एलेक्साई करिवोरुचुको ने बताया है कि भारत को एके-100 सीरीज की असाल्ट राइफल बेहद कम कीमत पर मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया रूसी सरकार के आदेश के मुताबिक भारत सरकार की औपचारिकताओं के तत्काल बाद असाल्ट राइफल बनाने की तकनीक भारत की हथियार कंपनियों को मुहैया कराई जाएगी। एलेक्साई करिवोरुचुको ने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ वर्षों में रूस के अन्य उन्नत हथियारों को भारत में बनाने के संबंध में भी करार मुमकिन है।


एके नाम के पीछे छिपा है नायाब रहस्य

अक्सर ही यह सवाल कौंधता है कि आखिरकार देश-दुनिया की फौज की पहली पसंद बनी असाल्ट राइफल का नाम एके-47 क्यों पड़ा। दरअसल, इसके पीछे एक कहानी है। यह जानकार हैरानी होती है कि पृथ्वी के 106 देशों की सेना की पहली पसंद एके-47 का ब्लू प्रिंट किसी प्रयोगशाला और कई वैज्ञानिकों के बीच तैयार नहीं हुआ था। इस असाल्ट राइफल का खाका अस्पताल के बेड पर घायल सिपाही के दिमाग में तैयार हुआ था। कई सेनाओं के लिए एक स्तंभ का काम करने वाली एके-47 का आविष्कार रूस के फौजी मिखाइल कलाश्निकोव ने किया था, जिनका दो साल पहले निधन हुआ है। मिखाइल कलाश्निकोव के नाम पर ही इस स्वचालित रायफल का नामकरण किया गया है। मिखाइल कलाश्निकोव का जन्म 10 नवम्बर 1919 को रूस के अटलाई प्रांत के कुर्या गांव में एक बड़े परिवार में हुआ था। वर्ष 1938 में विश्वयुद्ध की आशंका के चलते उन्हें सेना में शामिल होने का मौका मिला तो कीयेव के टैंक मेकेनिकल स्कूल में तैनाती के दौरान उनका तकनीकी कौशल उभरने लगा था। वर्ष 1941 में एक भीषण युद्ध के दौरान कलाश्निकोव बुरी तरह घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। अस्पताल के बिस्तर पर बिताए 6 महीनों में कलाश्निकोव ने अपने दिमाग में एक सब-मशीनगन का रफ डिजाइन तैयार कर लिया था। वह वापस अपने डिपो में लौटे और साथियों की मदद से मूर्तरूप दिया।

कठिन नाम को संक्षिप्त करने पर बना एके-47

जून 1942 में कलाश्निकोव की सब-मशीनगन वर्कशॉप में तैयार हो चुकी थी। चूंकि यह मिखाइल का ऑटोमैटिक हथियार है, इसलिए इसका नाम दिया गया आवटोमैट कलाशनिकोवा, जिसे बाद में ऑटोमैटिक कलाश्निकोव कहा जाने लगा। बोलने में मुश्किल होने की वजह से इसका नाम संक्षिप्त करते हुए एके-47 कर दिया गया। अब तो बाजार में एके-56, एके-74 और एके-100 भी उपलब्ध हैं।


पानी के अंदर भी गोली सीधे जाती है

क्या आप जानते हैं कि पानी के अंदर निशाना लगाना आसान नहीं होता है। वजह है कि पानी के घर्षण के कारण गोली बहक जाती है। दूसरी ओर,एके-47 से पानी के अंदर से हमला करने पर भी गोली सीधे जाती है। गोलियों की गति इतनी तेज होती है, कि पानी का घर्षण भी उसे कम नहीं कर पाता है। इस राइफल में पहले की सभी राइफल तकनीकों का मिश्रण है। अगर विस्तार से देखें तो इसके लॉकिंग डिजाइन को एम1 ग्रांड राइफल से लिया गया है। इसका ट्रिगर और सेफ्टी लोक रेमिंगटन राइफल मॉडल 8 से लिया गया है, जबकि गैस सिस्टम और बाहरी डिजाइन एस.टी.जी.44 से लिया गया है।