8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Unnao rape case: अब पीड़िता के खिलाफ दिए गए साक्ष्यों की होगी फॉरेंसिक जांच, अदालत ने दिया आदेश

Unnao Rape Case: उन्नाव रेप केस मामले में सच्चाई जानने के लिए अदालत ने पीड़िता की आवाज की फोरेंसिक जांच के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में एक याचिका दायर की गई थी। जिसे अदालत में स्वीकार कर लिया है।

2 min read
Google source verification
उन्नाव रेप केस (फोटो सोर्स- पत्रिका)

फोटो सोर्स- पत्रिका

Unnao Rape Case उन्नाव रेप केस मामले में पीड़िता को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अब पीड़िता के वायरल हो रहे ऑडियो और वीडियो की फॉरेंसिक जांच होगी। इस संबंध में अदालत ने आदेश दिया है। दरअसल दुष्कर्म मामले में आरोपी शुभम सिंह ने राज एवेन्यू कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। जिसमें उन्होंने मांग की है कि पीड़िता की आवाज के नमूने की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। जिससे कि स्पष्ट हो सके कि यह आवाज किसकी है। शुभम सिंह की याचिका पर अदालत ने आदेश दिया कि पीड़िता की आवाज के नमूने लेकर उसे केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाए। इसका मिलान 'केस रिकॉर्ड' में मौजूद वीडियो और ऑडियो से किया जाए। पीड़िता फॉरेंसिक जांच का विरोध करती चली आ रही है।

आरोपी की तरफ से याचिका डाली गई

उत्तर प्रदेश के उन्नाव दुष्कर्म मामले में शुभम सिंह की तरफ से उनके वकील अखंड प्रताप सिंह ने राज एवेन्यू कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जिसमें उन्होंने पीड़िता की आवाज और केस रिकॉर्ड में मौजूद ऑडियो और वीडियो की आवाज के मिलन की मांग की थी। उन्होंने दावा किया कि 'केस रिकॉर्ड' में शामिल ऑडियो-वीडियो की आवाज पीड़िता की है।

पीड़िता बोली- उसकी आवाज नहीं

उन्नाव रेप केस की पीड़िता ने अदालत को बताया है कि ऑडियो-वीडियो में उसकी आवाज नहीं है। उन्होंने इसका विरोध किया है। दरअसल 'केस रिकॉर्ड' में मौजूद रिकॉर्डिंग में आवाज आ रही है कि - "वह अपनी मर्जी से घर से गई थी।" इसके साथ और भी कई ऑडियो वायरल हो रहे हैं। जिनमें पीड़िता और उसके चाचा के बीच बातचीत शामिल है।

याचिका की गई स्वीकार

फॉरेंसिक जांच से केस रिकॉर्ड में मौजूद आवाज और पीड़िता की आवाज के मिलान से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अधिवक्ता ने बताया कि अगर फॉरेंसिक जांच की अनुमति नहीं दी गई तो आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से वंचित रहना पड़ेगा। निष्पक्ष सुनवाई के लिए पीड़िता की आवाज की फोरेंसिक जांच जरूरी है। शुभम सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश मुरारी प्रसाद सिंह ने निर्देश दिया कि पीड़िता की आवाज के नमूने लेकर केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजे जाएं और उसकी जांच कराई जाए।