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इस खजांची को अखिलेश यादव ने दिया था सहारा, जानिए किस हालत में है वो

इस खजांची को अखिलेश यादव ने दिया था सहारा, जानिए किस हालत में है वो
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akhilesh yadav

Akhilesh yadav

कानपुर देहात. 8 नवम्बर 2016 को भले ही लोग भूल गए हो पर लोग उस बच्चे को कभी नहीं भूल पाएंगे, जिसने उस नोटबंदी के ऐतिहासिक फैसले के दौरान 2 दिसम्बर को जन्म लिया था। लोगों के लिए वो दिन भले ही खासा मुश्किलों भरा रहा हो लेकिन कानपुर देहात के झींझक क्षेत्र के सरदारपुर की रहने वाली सर्वेशा देवी के लिए वो दिन काफी खुशियों भरा रहा, जब नोटबंदी के दौरान बैंक में लगी लाइन में सर्वेशा देवी ने बच्चे को जन्म दिया और बैंक में जन्म होने पर उसका नाम खजांची रख दिया गया। अखिलेश यादव ने उसे सहायता राशि के तौर में दो लाख रुपये उस बच्चे की देखभाल के लिए उसकी मां को दिए थे।

ये रही खजांची की पूरी कहानी

कानपुर देहात देहात के झीझंक ब्लाक के सरदारपुर डेरापुर निवासी सर्वेशा देवी की जो प्रधानमन्त्री द्वारा लिए गए उस एतिहासिक फैसले के तहत नोटबंदी के दौरान कोख में पल रहे बच्चे को बैंक में लगी लाइन के दौरान दिया। जिसके जन्म के बाद मानो सर्वेशा देवी की किस्मत खुल गई हो। जब बच्चे का जन्म बैंक में हुआ तब वह गरीबी की हालत से जूझ रही थी। सर्वेशा देवी की हालत इतनी दयनीय थी कि वह पति के मौत के बाद एक-एक पैसे के लिए परेशान थी। एक पैर से दिव्यांग सर्वेशा के पास न तो रहने के लिए घर था और ना ही उसके पास एक भी पैसा, जिससे वो अपने पांच बच्चों का पालन पोषण कर सके। खजांची की मां को सरकारी योजना से मिली कॉलोनी जिसकी क़िस्त लेने वो बैंक में गई थी, तभी उसको प्रसव पीड़ा हुई और उसने बच्चे को जन्म दिया, उस बच्चे का नाम बैंक के अधिकारियों और वहां पर मौजूद लोगों ने खजांची नाथ रख दिया।

नोटबंदी के दौरान जन्मे खजांची की किस्मत मानो बैंक में जन्म लेने से उसकी किस्मत चमक सी गई और खजांची की मां सर्वेशा देवी को अखिलेश यादव ने दो लाख रुपए की सहायता राशि दी। ऐसी कोई सभा नहीं होगी जहां अखिलेश यादव उस खजांची का नाम ना लेते हो, जिससे खजांची की पूरे देश भर चर्चाएं थी उस दौरान सर्वेशा देवी को मिली कॉलोनी तो बन गई है लेकिन उसके ससुराल वाले उसे वहां रहने नहीं दे रहे है।

ससुराल वाले करते है अत्याचार

उसके पति के मौत के बाद ससुराल वाले उसको वहां पैसों के लालच में उसे डर दर की ठोंकरे खाने को मजबूर कर रहे है। कई बार उसने इसकी शिकायत भी थाने में की, लेकिन पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिससे वो अपने पांच बच्चों के साथ अपने मायके में रह रही है और वहीं रहकर मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही है।

सरकार द्वारा मिली राशि उसने बैंक में खजांची के लिए जमा कर दिया और कुछ पैसों से अपने एक बच्चे को हुई टीवी की बीमारी का इलाज आगरा से करवा रही है। सर्वेशा देवी की माने तो पति की मौत के बाद उसके ससुराल वाले उसको मारते पीटते रहते थे और वहां से भाग जाने को बोलते थे। उन लोगों से परेशान होकर वो अपनी मां और भाई के वहां रहने मायके आ गई।

सर्वेशा लगा रही योगी से गुहार

सर्वेशा का कहना है खजांची को वो खूब पढ़ाना लिखाना चाहती है, लेकिन पैसों की तंगी की वजह से वो नहीं कर पा रही है। सर्वेशा ने कहा कि अगर शायद सरकार उसके बच्चों को अच्छी शिक्षा देगी और उसको सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ भी मिलेगा। सर्वेशा सरकार से अपने बच्चो के उज्जवल भविष्य की भी आस लगाए बैठी हुई है, लेकिन देखने वाली बात ये है कि उस नोटबंदी के दौरान जन्मे खजांची को योगी सरकार से अब क्या मदद मिलेगी।