
मायावती-अखिलेश के चलते डर गईं अनुप्रिया पटेल, अचानक लिया ये बड़ा फैसला, बिगड़ सकता है गणित
कानपुर. सियासत भी क्या चीज होती है, कभी अपने को दूर करती देती है तो वक्त पड़ने पर फिर से एक गले मिलाती है। कुछ ऐसा ही कानपुर जोन के दो राजनीतिक घरानों में हुआ। 2017 विधानसभा चुनाव से पहले जहां यादव परिवार की रार खुलकर सड़क पर आ गई, वहीं अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल की मौत के बाद मां और बेटी में दल को लेकर जंग शुरू हो गई। मोदी लहर में बेटी जीत गई तो हार का घूंट पीकर मां चुपचाप बैठ गई। लेकिन गोरखपुर और फूलपुर में हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद उनके सहयोगी दल भी हलकान नजर आए। बुआ-बबुआ के बीच गठबंधन की आवाज केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल के कानों में सुनाई दी तो वह मां के दर पर आकर उनका हाल चाल पूछा और 2019 में जीत का आर्शीवाद मांगा। बेटी को मां ने सियासत के बजाए लम्बी आयु का आर्शीवाद देकर रवाना कर दिया।
नवाबगंज में रहती हैं कृष्णा पटेल
नवाबगंज थानाक्षेत्र स्थित एक अपार्टमेंट में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल अपनी छोटी बेटी के साथ रहती हैं। कुष्णा पटेल अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल की पत्नी हैं। अनुप्रिया का जन्म 28 अप्रैल 1981 को कानपुर में हुआ था। अनुप्रिया ने साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री हासिल करने के साथ एमबीए भी किया है। सोनेलाल की मौत 2009 में कम्पनीबाग के पास रोड एक्सीडेंट में हो गई थी। उस वक्त अनुपिया पटेल अपने पिता की सियासी जमीन तैयार करने में उनका साथ दे रही थीं। सोनेलाल पटेल ने अनुप्रिया को अपना महासचिव बनाया था। पिता की मौत के बाद वह पार्टी की सर्वेसवा हो गईं और वाराणसी की रोहनियां विधानसभा सीट से भी चुनाव जीतीं। महज 35 वर्ष की अनु्प्रिया पिछड़ा वर्ग से हैं और पूर्वी यूपी के मिर्जापुर से 2014 में सांसद चुनी गईं। विधानसभा चुनाव के वक्त मां और बेटी के बीच जमकर टकराव हुआ। मां कृष्णा पटेल ने अनुप्रिया समेत सात नेताओं को अपना दल से निकाल दिया। मां से अलग होकर अनुप्रिया ने अपना दल एस नाम की पार्टी बनाई और यूपी में जीत दर्ज की।
इसके चलते बढ़ाए कदम
कंंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल नवाबगंज स्थित मां के घर पहुंची थीं और उनके साथ तीन घंटे तक बातचीत की थी। घर के बाहर उन्होंने कहा था कि मां बीमार थीं, उन्हें देखने के लिए आई हूं। लेकिन बेटी के जाने के बाद कृष्णा पटेल ने कहा मैं पूरी तरह स्वस्थ्य हूं। बिटिया जब चाहे अपनी मां से मिल सकती है। इसमें सियासत कैसी। लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा को भारी पड़ने वाला है। हालांकि मां-बेटी की इस मुलाकात को राजनीतिक हलकों में दोनों दलों के संबंधों को नई दिशा देने के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं मां कुष्णा पटेल इसे महज सामान्य मुलाकात बता रही हैं। पर इसके पीछे की कहानी कुछ और ही है। जानकारों का मानना है कि यूपी की एक दर्जन से ज्यादा सीटें कुर्मी बाहूल्य हैं, जहां 2014 में कमल खिला था। लेकिन भाजपा के पास कुर्मी समुदाय का कद्दावर नेता नहीं होने के चलते इसका लाभ सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को मिल सकता है। एक वक्त ऐसा था जब नरेश उत्तम और सोनेलाल पटेल की अच्छी पटती थी। 2017 विधानसभा चुनाव के बाद सपा प्रदेश अध्यक्ष सेनेलाल की पत्नी को सपा में लाने का भरकस प्रयास कर रहे हैं और दो चुनाव में सपा को मिली जीत के बाद कृष्णा पटेल किसी भी वक्त अखिलेश के साथ खड़ी नजर आ सकती हैं।
तो बिगड़ सकता है अनुपिया का खेल
जानकारों की मानें तो कृष्णा पटेल 2019 के लोकसभा चुनाव में बेटी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती हैं और इसी के कारण केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को मां की चौखट पर आना बड़ा। गठबंधन का साथ अगर कृष्णा पटेल ने दे दिया तो कुर्मी समाज का बोट लगभग सपा-बसपा के पाले में जा सकता है। इसी के चलते अनुप्रिया अपनी मां से सारी दुरियां मिटाने के लिए लगी हुई हैं। वहीं कृष्णा पटेल ने अपनी बेटी अनुप्रिया पटेल से मुलाकात की और उन्हें छोड़ने के लिए बाहर तक आई। इस दौरान उनकी छोटी बेटी पल्लवी भी साथ में थी। जानकारों की मानें तो बैठक के दौरान मां कृणा पटेल ने बेटी अनुपिया का साथ तो देना चाहती हैं, पर बदले में उन्होंने मांग रखी है। सूत्रों की मानें 15 अप्रैल के बाद होने वाले यूपी मंत्रिमंडल के विस्तार में कृष्णा पटेल अपनी छोटी बेटी को मंत्री पद पर देखना चाहती हैं और यदि ऐसा हुआ तो 2019 के लोकसभा चुनाव में मां-बेटी एक साथ चुनावी अखाड़े में नजर आएंगी।
सेनेलाल पटेल ने रखी थी नींव
कुर्मी समाज को एकजुट करके सोनेलाल पटेल ने अपना दल की नींव रखी। बड़ी बेटी अनुप्रिया को शिक्षा पूरी करने के बाद अपने साथ सियासत में उतार दिया। लेकिन सोनेलाल की मौत के बाद अपना परिवार में रार ठन गई। बीजेपी से गठबंधन के बाद मीरजापुर से सांसद बनी अनुप्रिया पटेल के खिलाफ मां कृष्णा पटेल छोटी बेटी पल्लवी 2017 विधानसभा चुनाव में उन्हें सबक सिखाने के लिए सपा का साथ दिया, लेकिन मोदी लहर के चलते बेटी को फिर कामयाबी मिली। मां-बेटी के बीच सियासी संग्राम से पहले पार्टी के वर्चस्व को लेकर छिड़ी जंग में चुनाव आयोग से अनुप्रिया पटेल को सफलता मिली। अपना दल सोनेलाल गुट को आयोग से मिली मान्यता के बाद अनुप्रिया बीजेपी से समझौते के बाद चुनाव में उतरी। बेटी से मिली हार के बाद मां कुष्णा पटेल अंदरखाने कुर्मी समाज में अपनी पकड़ बनाती रहीं। फूलपुर कुर्मी बाहूल्य सीट पर अनुप्रिया ने चुनाव प्रचार किया, तो कृष्णा ने भी अपना जौहर दिखाया। 2018 में मां को जीत तो बेटी को हार मिली।
Published on:
13 Apr 2018 10:15 am
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