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सावाधान : बच्चों पर हुआ एईएस का हमला

एक तरफ जहां मौसम तेजी के साथ बदल रहा है, वहीं दूसरी तरफ बीमारियां भी तेजी के साथ बढ़ी हैं. खासतौर पर बच्चों में एक्यूट इंसेफलाइटिस के मामले बढ़े हैं. दिमागी बुखार के साथ बच्चों को समय पर सही इलाज नहीं मिलने की वजह ये उनकी हालत भी काफी बिगड़ रही है.
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कानपुर

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Alok Pandey

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Updated: 25 Oct 2018, 2:22 PM IST

Kanpur

सावाधान : बच्चों पर हुआ एईएस का हमला

कानपुर। एक तरफ जहां मौसम तेजी के साथ बदल रहा है, वहीं दूसरी तरफ बीमारियां भी तेजी के साथ बढ़ी हैं. खासतौर पर बच्चों में एक्यूट इंसेफलाइटिस के मामले बढ़े हैं. दिमागी बुखार के साथ बच्चों को समय पर सही इलाज नहीं मिलने की वजह ये उनकी हालत भी काफी बिगड़ रही है. मेडिकल कॉलेज के बालरोग अस्पताल में कानपुर के अलावा आसपास के 12 जिलों से बच्चे लगातार भर्ती हो रहे हैं. हालत यह है कि अस्पताल के एनआईसीयू में क्षमता से तीन गुना ज्यादा बच्चे भर्ती हैं.

मिली है ऐसी जानकारी
इस बारे में बालरोग विभाग के हेड प्रो. यशवंत राय कहते हैं कि अस्पताल में 120 बेड की क्षमता है, जबकि 160 से ज्यादा बच्चों का इलाज किया जा रहा है. इनमें सबसे ज्यादा बच्चे एईएस के हैं. इसके बाद डायरिया से पीड़ित बच्चे भी काफी भर्ती हो रहे हैं. अस्पताल में बेड ऑक्यूपेंसी सौ फीसदी से भी ज्यादा है. यह बच्चे कानपुर के अलावा आसपास के जिलों से भी आ रहे हैं. खास बात यह है कि शुरुआत में इन बच्चों का इलाज आसपास के नीम हकीम से कराया गया, इस दौरान बच्चे की हालत बिगड़ गई. इसके बाद उन्हें यहां भर्ती कराया गया.

ऐसे बढ़ी संख्या
अगस्त के महीने में ओपीडी में भर्ती होने वाले बच्‍चों की संख्‍या 6192 थी. इनमें इनडोर 831 थे. वहीं बेड ऑक्युपेंसी रेट 138 फीसदी बढ़ा. इसके बाद सितंबर में ओपीडी में भर्ती होने वाले बच्‍चों की संख्‍या 8052 रही. इनमें इनडोर 993 थे. बेड ऑक्युपेंसी रेट 165 फीसदी रहा.

ये बनता है कारण
बच्चों में यह बीमारी नमी या बदलते मौसम में ज्यादा होती है. एई का सिंड्रोम सांस या मुंह के रास्ते शरीर में आता है, जहां गंदगी होती है या खाना बनाने में साफ सफाई पानी साफ नहीं होता वहां इसका इंफेक्शन तेजी से फैलता है.

ऐसे होते हैं लक्षण

- अचानक तेज बुखार आता है, सिर में तेज दर्द होता है

- शरीर के अंगों में जकड़न और ऐंठन होती है

- बच्चे का सुस्त होना या बेहोश हो जाना

- शरीर सुन्न पड़ जाता है

पता चलने पर खुद ऐसे बरतें अहतियात

- तेज बुखार होने पर शरीर को साफ व ताजे पानी से पोछें

- बच्चा बेहोश न हो तो उसे साफ पानी में ओआरएस का घोल मिला कर पिलाएं

- बच्चे को बालरोग विशेषज्ञ को दिखाएं