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बिकरू कांड – कानपुर टू फरीदाबाद का रूट चार्ट आया सामने, ये रही विकास दुबे की गतिविधियां

बिकरू कांड के बाद हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और उसके साथी शिवली होते आगे बढ़े तो रास्तेे में साथियों ने मदद की। जिसके सहयोग से फरीदाबाद पहुंच गया। एसटीएफ की जांच में सामने आ रहे हैं राज

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बिकरू कांड - कानपुर टू फरीदाबाद का रूट चार्ट आया सामने, ये रही विकास दुबे की गतिविधियां

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कानपुर. जैसे-जैसे एसटीएफ की जांच आगे बढ़ रही है। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और उसके गुर्गों की असलियत सामने आ रही है। बिकरू कांड के बाद विकास दुबे अपने सहयोगियों के साथ रसूलाबाद होते हुए आगे गया था। रसूलाबाद में प्रभात मिश्रा ने मास्क पहनकर बाजार में जमकर खरीदारी की। जहां उसने विकास दुबे और अमर दुबे के लिए कपड़े खरीदे। विकास दुबे की मदद करने वाले लोगों की गिरफ्तारी बिकरू गांव से फरीदाबाद पहुंचने का रूट सामने आ रहा है।

एसटीएफ की पूछताछ में खुलासा

एसटीएफ की पूछताछ में गिरफ्तार साथियों ने बताया कि विकास दुबे, अमर दुबे, प्रभात मिश्रा घटना के बाद शिवली नदी के पुल होते हुए आगे बढ़े। जहां पर प्रभात मिश्रा ने अपने सहयोगी विष्णु कश्यप को कार के साथ मौके पर बुलाया। विगत 3 जुलाई 2020 को विष्णु कश्यप द्वारा लाए गए स्विफ्ट डिजायर कार से विकास दुबे, अमर दुबे प्रभात मिश्रा निकला। यहां से विष्णु कश्यप उन्हें लेकर रसूलाबाद स्थित अपने बहनोई रामजी के घर गया। 3 जुलाई को ही रसूलाबाद में विकास दुबे और उसके गुर्गों के लिए प्रभात मिश्रा ने अंडर गारमेंट, लोवर, टी शर्ट खरीदा था। प्रभात मिश्रा मुंह पर मास्क लगाकर खरीदारी करने के लिए गया था।

औरैया से फरीदाबाद गया विकास दुबे और उसके गुर्गे

दोपहर तक रुकने के रामजी तीनों को लेकर ने करिया झाला मजरा स्थित एक आम की बगिया पहुंचे। यहां अर्पित मिश्रा नाम का एक नया सहयोगी सामने आया। जिसने अपने खेत में बने ट्यूबवेल पर तीनों को रुकवाया। यहां पर शुभम पाल निवासी मंगलपुर ने संपर्क करने के बाद तीनों के रुकने के लिए सुरक्षित ठिकाना दिया। 2 दिनों तक यहां रुकने के बाद 5 जुलाई 2020 को शुभम पाल तीनों अपराधियों को औरैया छोड़ आया। औरैया से तीनों अपराधी फरीदाबाद हरियाणा पहुंच गए। जहां से तीनों ने अपने रास्ते अलग अलग कर लिए। 2 जुलाई की घटना के बाद विकास दुबे और उसके गुर्गों के भागने का रूट चार्ट सामने आने के बाद एक बार फिर पुलिस की किरकिरी हो रही है कि 2 जुलाई से 5 जुलाई के बीच क्षेत्र में रहने के बाद भी खोज नहीं पाई।